ऊना,सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी – यूएनडीपी हॉस्पिटल सेफ्टी प्रोग्राम के अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ऊना एवं जियोहाज़ार्ड्स सोसाईटी नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में दो दिवसीय टेबलटॉप एक्सरसाइज एवं फायर सेफ्टी व इमरजेंसी रिस्पॉन्स पर आधारित मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया।
अतिरिक्त उपायुक्त, ऊना इशांत जसवाल ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की तैयारियों को परखना तथा हॉस्पिटल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। अभ्यास के दौरान आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, सूचना एवं संचार तंत्र, विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा अस्पताल की समग्र आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का व्यावहारिक परीक्षण किया गया।
उन्होंने बताया कि दो दिवसीय अभ्यास में क्षेत्रीय अस्पताल प्रशासन के साथ विभिन्न श्रेणियों के चिकित्सीय एवं गैर-चिकित्सीय स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर, मैट्रन, चीफ फार्मेसी ऑफिसर, वार्ड सिस्टर, स्टाफ नर्स, सिक्योरिटी इंचार्ज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त पुलिस विभाग, होम गार्ड्स, अग्निशमन सेवाएं, स्वयंसेवी संस्थाएं, डीडीएमए स्टाफ तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भी मॉक ड्रिल में भाग लेकर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाने में सहयोग दिया।
मॉक ड्रिल के दौरान अस्पताल परिसर में आग लगने जैसी आपात स्थिति की परिकल्पना की गई। इस दौरान अलार्म एवं सूचना तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया, मरीजों एवं स्टाफ की सुरक्षा, सुरक्षित निकासी व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों एवं संसाधनों का उपयोग, आपसी संचार तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को व्यावहारिक रूप से परखा गया। अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में अस्पताल की सेवाओं को यथासंभव सुरक्षित एवं निरंतर बनाए रखते हुए मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।
अभ्यास के दौरान सामने आए प्रमुख निष्कर्षों में नियमित रूप से फायर सेफ्टी एवं आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल आयोजित करने, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट रखने तथा विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही हॉस्पिटल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान एवं संबंधित स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसीजर्स की समय-समय पर समीक्षा एवं अद्यतन करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण एवं जीवनरक्षक सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं में आपदा के दौरान न्यूनतम समय में अधिकतम प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे व्यावहारिक अभ्यास अस्पताल प्रशासन एवं स्टाफ की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ विभिन्न विभागों एवं संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल एवं समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों की संरचनात्मक एवं गैर-संरचनात्मक सुरक्षा, जीवन की सुरक्षा तथा आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए नियमित प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन योजनाओं की निरंतर समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभ्यासों से आपदा की स्थिति में संभावित चुनौतियों की पहचान करने और समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है।

