लखनऊः उत्तर प्रदेश कैडर की तेजतर्रार और चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। अपनी सख्त कार्यशैली और प्रशासनिक फैसलों के लिए पहचानी जाने वाली 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने बीते 30 अगस्त को निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जिंदगी के एक नए उद्देश्य का हवाला देते अपने पद से इस्तीफा दिया था।
इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते राष्ट्रकवि जयशंकर प्रसाद के मशहूर नाटक ‘चंद्रगुप्त’ की प्रेरक पंक्ति लिखी- प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो। इस्तीफा मंजूर होने की आधिकारिक सूचना मिलने से ठीक दो दिन पहले दिव्या मित्तल माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंची थी। वहां से अपनी तस्वीर साझा करते उन्होंने लिखा था कि आगे की राह कठिन है… सद्बुद्धि देना मां।
इस पोस्ट के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में उनके भावी कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। दिव्या मित्तल करीब 13 वर्षों तक सरकारी सेवा में रहीं। उन्होंने ऐसे मोड़ पर प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहा है, जब उनके सेवाकाल के लगभग 17 साल अभी बाकी थे।
मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद लंदन में लाखों के पैकेज वाली कॉरपोरेट नौकरी की थी। देश सेवा के जज्बे के साथ वह भारत लौटीं और पहले ही प्रयास में यूपीएससी पास कर गुजरात कैडर में आईपीएस बनीं। आईपीएस की ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने अगले साल 2013 में दोबारा परीक्षा पास की और आईएएस अफसर बनीं। वह मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया में बतौर जिलाधिकारी तैनात रहीं, जहां लापरवाही बरतने वाले मातहतों पर त्वरित कार्रवाई के चलते वह खासी सुर्खियों में रहीं। हाल ही में मई महीने में उन्हें देवरिया से स्थानांतरित कर लखनऊ में राजस्व विभाग का विशेष सचिव बनाया गया था।
दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भी सिविल सेवा का हिस्सा रह चुके हैं। वह वर्ष 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (ITS) अधिकारी थे और उन्होंने साल 2022 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।