लुधियानाः मेहरबान में सीडे पिंड इलाके में एक युवक ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों से तंग आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली का विरोध करते हुए दोपहर 1 बजे तक शव को फंदे से नीचे नहीं उतारने दिया। परिजनों का साफ कहना था कि जब तक आरोपियों पर मामला दर्ज नहीं होता, वे डेड बॉडी नहीं उतारेंगे। मृतक के दो बच्चे हैं, जिनमें एक लड़का और एक लड़की है। पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज करने को राजी हुई तब जाकर परिजनों ने शव को फंदे से उतारने दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है और मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है। मृतक के भाई चमकौर सिंह ने बताया कि उसके भाई का अपनी पत्नी से मामूली बातों पर मनमुटाव चल रहा था।
10 मई को पत्नी ने सरपंच कुलदीप को फोन किया, जिसके बाद सरपंच ने ससुराल वालों को बुला लिया। साले और अन्य लोगों ने घर आकर मेरे भाई की टांग तोड़ दी थी। हम तीन महीने तक न्याय के लिए थाने के धक्के खाते रहे, लेकिन पुलिस ने कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की। भाई का आरोप है कि सरपंच कुलदीप आम आदमी पार्टी के नेता हरदीप सिंह मुंडियां का खास है,जिसकी धौंस देकर पुलिस पर दबाव बनाया गया और उनकी कोई सुनवाई नहीं होने दी गई। चमकौर सिंह ने बताया कि पत्नी बच्चों की पढ़ाई खराब होने का बहाना बनाकर उन्हें अपने साथ मायके ले गई थी। कल फिर दोनों के बीच कहासुनी हुई और वह दोबारा मायके चली गई। इसके बाद ससुराल वालों ने थाने में शिकायत कर दी। परिजनों का आरोप है कि कल शाम पुलिस उनके घर आई और भाई को डरा-धमका कर चली गई। रात को सभी खाना खाकर सो गए। सुबह उठकर देखा तो भाई ने कमरे का दरवाजा नहीं खोला।
जब दरवाजा तोड़ा गया तो वह फंदे से लटक रहा था। परिजनों को सुबह 7 बजे सुसाइड का पता चला था। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन परिजन आरोपियों के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। परिवार ने पुलिस को शव के पास तक नहीं जाने दिया। आखिरकार दोपहर 1 बजे पुलिस अधिकारियों ने परिजनों की मांग मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद शव को फंदे से उतारा गया। मौके पर पहुंचे जांच अधिकारी जगदीप एस गिल ने बताया कि मृतक का अपनी पत्नी और ससुराल वालों से विवाद चल रहा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जिन-जिन लोगों के नाम उन्होंने लिखवाए हैं, उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के मुताबिक अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन हर एंगल से मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
