अमृतसरः देश की विभिन्न जेलों में नजरबंद बंदी सिंहों की रिहाई और चढ़दी कला (समृद्धि) के लिए लंबे समय से शिरोमणि कमेटी की ओर से सभी गुरुद्वारा साहिबानों और शैक्षणिक संस्थानों में अरदास समागम करवाए गए। इसके तहत शिरोमणि कमेटी के प्रबंध वाले सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबानों में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए और सभी शैक्षणिक संस्थानों में श्री सुखमनी साहिब का पाठ करके बंदी सिंहों की चढ़दी कला के लिए अरदास की गई। इसी कड़ी में गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, करहाली (पटियाला) में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के अवसर पर शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज बंदी सिंहों की चढ़दी कला के लिए अरदास में शामिल हुए, जबकि जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने तख्त श्री दमदमा साहिब में अरदास में शिरकत की।
जहां सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से संबंधित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के उपरांत हजूरी रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन किया और सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह और सिंह साहिब ज्ञानी राजदीप सिंह ने संगत के साथ विचार साझा किए। इस अवसर पर संबोधित करते हुए शिरोमणि कमेटी सदस्य भाई राजेंद्र सिंह मेहता ने कहा कि जिन सिंहों ने अपने जीवन का लंबा समय जेलों में बिताया है, उनकी रिहाई का मामला सिख कौम की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि ये वे बंदी सिंह हैं जिन्होंने सिखों पर हुए अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का रास्ता चुना था। ये भारतीय कानून के अनुसार मिली सजाओं से कहीं अधिक समय जेलों में बिता चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारें सिख भावनाओं से जुड़े इन महत्वपूर्ण मामलों के प्रति हमेशा ही लापरवाह रही हैं। भाई बलवंत सिंह राजोआणा की सजा परिवर्तन के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के कहने के बावजूद सरकार ने कोई निर्णय नहीं किया, जो कानूनी अधिकारों के साथ भी नाइंसाफी है। इसी प्रकार भाई जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए भी पैरोल नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जब कहीं सुनवाई न हो तो सिख हमेशा गुरु का सहारा लेता है। इसी के तहत आज शिरोमणि कमेटी की अंतरीम कमेटी के निर्णय के अनुसार सभी गुरुद्वारा साहिबानों में श्री अखंड पाठ साहिब करवाए गए हैं। उन्होंने सरकार से सिख भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बंदी सिंहों संबंधी निर्णय लेने का आग्रह किया। इस अवसर पर बंदी सिंह भाई गुरदीप सिंह खेड़ा और भाई लखविंदर सिंह लक्खा के परिवारों को शिरोमणि कमेटी की ओर से सम्मानित भी किया गया।
समागम में शिरोमणि कमेटी के अंतरीम कमेटी सदस्य एस. मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, सदस्य भाई राजेंद्र सिंह मेहता, एस. सुरजीत सिंह भिट्टेवड़, एस. हरजाप सिंह सुल्तानविंड, एस. बावा सिंह गुमानपुरा, भाई अजैब सिंह अभ्यासी, ओएसडी एस. सतबीर सिंह धामी, सचिव एस. बलविंदर सिंह काहलवां, एस. गुरिंदर सिंह मथरेवाल, निजी सचिव एस. शाहबाज सिंह, अतिरिक्त सचिव एस. बिजय सिंह, एस. जसविंदर सिंह जस्सी, उप सचिव एस. मंजीत सिंह, एस. हरभजन सिंह वक्ता, एस. सुखबीर सिंह, एस. गुरमीत सिंह मुक्तसरी, श्री दरबार साहिब के जनरल मैनेजर एस. मेजर सिंह, सुपरिटेंडेंट एस. निशान सिंह और एस. मलकीत सिंह बहिड़वाल, मैनेजर एस. नरेंद्र सिंह, अतिरिक्त मैनेजर एस. बिक्रमजीत सिंह झांगी, एस. गुरतिंदरपाल सिंह कादिया, फेडरेशन नेता एस. अमरबीर सिंह ढोट, एस. कुलवंत सिंह पंडोरी, बंदी सिंहों के परिवार के सदस्यों में से बीबी गुरजीत कौर और बीबी सुमन कौर सहित संगत उपस्थित रहे।