अमृतसर: शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) की ओर से पंथक एकता को लेकर एक जरुरी प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई। इस दौरान पार्टी के सीनियर नेता करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने पंजाब के अधिकारों और पंथक मुद्दों को लेकर पार्टी का रुख साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब और पंथ से जुड़े हुए अहम मुद्दों पर सफाई की बिना किसी भी राजनीतिक गठबंधन को लेकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हुए कार्यकर्ता पंच-सरपंच और नेता पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में पुनर्सुरजीत अकाली दल के साथ जुड़ रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सभी लोगों को एकजुट करना है। इसके लिए जाति और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर दलित समुदाय के साथ-साथ सभी पंजाबियों को एक ही मंच पर लाने की कोशिश भी की जा रही है। बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर चल रही चर्चा पर भी पीर मोहम्मद ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि अभी के समय में उनकी पार्टी को बीजेपी के साथ गठबंधन करने की कोई जरुरत नहीं है।
यदि बीजेपी या केंद्र सरकार अकाली दल के साथ कोई भी समझौता करना चाहती है तो सबसे पहले उसको पंजाब और पंथक के मुद्दों पर अपना साफ दृष्टिकोण सभी के सामने रखना होगा। पार्टी की प्रमुख मांगों की यदि बात करें तो इसमें चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार बहाल करना, अपनी सजा पूरी कर चुके सभी बंदी सिंहो को रिहा करना, पंजाब के पानी पर रिपेरियन कानून के मुताबिक पंजाब के अधिकारों को सुनिश्चित करना और पंजाबी भाषी क्षेत्रों में पंजाबी का इस्तेमाल करना जैसी मांगे शामिल है।
पीर मोहम्मद ने कहा कि पंजाब के हितों से जुड़े हुए इन मुद्दों पर कोई भी समझौता नहीं हो सकता है। राजनीतिक गठबंधन से पहले पंजाब के अधिकारों और पंथक मांगों को लेकर साफ नीति सामने आना जरुरी है। इसके अलावा उन्होंने पंजाब से युवाओं के लगातार हो रहे म्राइगेशन पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि युवाओं को पंजाब में ही शिक्षा और रोजगार के अच्छे अवसर देने के लिए क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी और स्किल सेंटरों की स्थापना करनी चाहिए। इससे युवाओं को अपने राज्य में अच्छा भविष्य बनाने के मौके मिलेंगे और विदेशों में माइग्रेट होने की जरुरत भी कम होगी।
इसके अलावा पंथक एकता के मुद्दे पर भी पीर मोहम्मद ने कहा कि 2 दिसंबर के श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे के अनुसार, बादल परिवार से अलग पंथक एकता के लिए हमेशा रास्ते भी खुले हैं। पंथक एकता समय की जरुरत है और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को गंभीरता से प्रयास करने चाहिए।