अमृतसरः श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने आज बेअदबी कानून को लेकर सरकार की ओर से पेश किए गए संशोधित ड्राफ्ट पर अपना पक्ष रखा। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार द्वारा बेअदबी कानून में संशोधन को लेकर भेजी गई रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दिए गए सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया और मसौदे में केवल करीब 10 प्रतिशत बदलाव किए गए हैं, जबकि 90 प्रतिशत सुझावों को अब तक स्वीकार नहीं किया गया। जत्थेदार गड़गज ने कहा कि पंथ गुरु साहिब के हुक्म के अनुसार चलता है। जत्थेदार ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून को लेकर किसी भी तरह की बहस या चर्चा नहीं की जानी चाहिए। पहले श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों और दिए गए सुझावों पर सहमति बनना जरूरी है।
इसके बाद ही इस मामले में आगे की विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। गुरु पंथ की सहमति के बिना कोई भी कानून नहीं बनाया जा सकता। गड़गज ने कहा कि आज पूरी दुनिया में गुरबाणी को मानने वाले सिख मौजूद हैं, इसलिए ऐसा कोई भी कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसे गुरु पंथ की मंजूरी प्राप्त न हो। इसी उद्देश्य से पिछले महीने पंजाब सरकार के विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को श्री अकाल तख्त साहिब बुलाया गया था। वहां पारदर्शिता के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने अपने-अपने विचार रखे।
सभी ने जयकारे लगाकर आपत्तियों को दूर करने तथा आवश्यक संशोधन करने पर सहमति जताई थी। जत्थेदार ने कहा कि बीड़ शब्द को शामिल करने और कस्टोडियन शब्द हटाने की मांग पर सरकार ने यह कहते हुए संशोधन नहीं किया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। सरकार ने कस्टोडियन शब्द को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जरूर दिया है, लेकिन शब्द को हटाया नहीं गया। वह अभी भी मसौदे में पहले की तरह मौजूद है। सरकार की ओर से दी गई इतनी विस्तृत व्याख्या की हमें आवश्यकता नहीं है। जिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी थी, उनमें से करीब 90 प्रतिशत बातों को स्वीकार नहीं किया गया है।

