गुरदासपुरः रोजी-रोटी की तलाश में विदेश गए जिले के गांव घणिये के बांगर के 36 वर्षीय युवक राजबीर सिंह की दुबई में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो जाने से पूरा इलाका शोक में डूब गया है। राजबीर सिंह एक साल पहले अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के सपने लेकर विदेश गया था, उसकी अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में पहुंचा दिया है। परिवार के पास उसकी मृतक देह को वतन लाने के लिए भी साधन नहीं हैं। राजबीर सिंह अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी कमाई से ही उसका घर चलता था।
परिवार के सदस्यों की आंखें उस समय आंसुओं से भर गईं जब उन्होंने बताया कि हादसे वाले दिन सुबह ही राजबीर ने वीडियो कॉल करके सबका हाल-चाल पूछा था। किसी को क्या पता था कि यह उसकी आखिरी बातचीत होगी। कुछ ही समय बाद आई हादसे की खबर ने परिवार की सारी खुशियां उजाड़ कर रख दीं। आज एक सुहागन के सिर से उसके जीवनसाथी का साया उठ गया है, दो छोटे बच्चे पिता के प्यार से हमेशा के लिए वंचित हो गए हैं और बुजुर्ग माता-पिता का बुढ़ापे का इकलौता सहारा भी हमेशा के लिए छिन गया है। घर में हर तरफ चीखें, सिसकियाँ और मातम का माहौल है।
गांव वासी भी इस दुखद घटना से गहरे सदमे में हैं। परिवार की आर्थिक हालत पहले ही काफी कमजोर बताई जा रही है। बड़ी मुश्किल से कर्ज उठाकर राजबीर को रोजगार के लिए विदेश भेजा गया था, ताकि घर की हालत सुधर सके पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब हालात यह हैं कि परिवार के पास दुबई से राजबीर की मृतक देह भारत लाने के लिए भी पर्याप्त साधन नहीं हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए मृतक राजबीर सिंह के पिता सुखविंदर सिंह और उनकी पत्नी नवनीत कौर ने बताया कि राजबीर सिंह एक साल पहले ही विदेश दुबई गया था। उन्होंने कहा कि राजबीर सिंह दुबई में ट्राला चलाता था और बीते दिन दुबई में हुए सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई।
पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से भावनात्मक अपील की है कि राजबीर सिंह की मृतक देह को जल्द से जल्द दुबई से भारत लाने के लिए हर संभव सरकारी मदद की जाए, ताकि उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जा सके। साथ ही परिवार ने मांग की है कि विधवा पत्नी, दो मासूम बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाए। इस दुखद घटना ने एक बार फिर उन हजारों पंजाबी परिवारों का दर्द सामने ला दिया है, जो अपने बच्चों को अच्छे भविष्य की उम्मीद में विदेश भेजते हैं। अब पूरे इलाके की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं कि वह इस दुखी परिवार की फरियाद सुने और समय पर मदद का हाथ बढ़ाकर मानवता का फर्ज निभाए।

