चंडीगढ़: हरियाणा अब केवल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने का मार्ग नहीं, बल्कि अपने आप में एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हरियाणा सरकार कुरुक्षेत्र में महाभारत और गीता की विरासत, पिंजौर के ऐतिहासिक उद्यान, सूरजकुंड की समृद्ध शिल्प परंपरा, मोरनी की पहाड़ियां, नारनौल-महेंद्रगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर और गांवों की हरियाणवी संस्कृति को एक साथ जोड़कर प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हरियाणा से पर्यटक केवल गुजरें नहीं, बल्कि यहां रुकें, घूमें, प्रदेश की संस्कृति और विरासत को करीब से जानें तथा ऐसे अनुभव लेकर लौटें कि वे दोबारा हरियाणा आने के लिए लालायित रहें। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार का नया संदेश है—‘घूमण आओ, हरियाणा देखो।’
उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण जरिया है। इसलिए सरकार पर्यटन को होटल और पर्यटन परिसरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, किसानों, शिल्पकारों, गाइड, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से जोड़ने पर जोर दे रही है।