नई दिल्ली: पाकिस्तान की आर्थिक हालत अभी तक नहीं सुधर रही है। विदेश मुद्रा की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका से करीबन 10 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा मांग ली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने खुद इस बात की पुष्टि की है। उनके अनुसार, इसको लेकर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ बातचीत भी चल रही है परंतु अभी तक इस पर कोई समझौता भी नहीं हुआ है।
इस वजह से पड़ी पाकिस्तान को पैसे की जरुरत
पाकिस्तान लंबे समय से डॉलर की कमी और विदेशी भुगतान के दबाव से जूझ रहा है। देश को अपने आयात और दूसरे बाहरी खर्चों के लिए लगातार विदेशी मुद्रा की जरुरत पड़ती है। ऐसे में सरकार यह चाहती है कि उनके पास पूरी मात्रा में डॉलर का भंडार रहे और पाकिस्तानी रुपये का दबाव कम हो जाए। पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका से मांगी हुई ये सुविधा सामान्य कर्ज या फिर क्रेडिट लाइन की तरह नहीं होगी। इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में भरोसा बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को यह संदेश देना होगा कि पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पहले से भी ज्यादा अच्छी हो।
कर्ज रोलओवर पर कम रहे निर्भर
पाकिस्तान पर जब भी आर्थिक संकट का समय आता है तो चीन, सऊदी अरब और दूसरे मित्र देशों से उसको कर्ज, जमा हुई राशि और वित्तीय मदद मिलती है। ऐसे में सरकार अब इस मॉडल पर ही अपनी निर्भरता को कम करना चाहती है। औरंगजेब के अनुसार, पाकिस्तान की कोशिश है कि वो अपनी छोटी अवधि के लिए मिलने वाली मदद और बार-बार होने वाले कर्ज रोलओवर पर कम निर्भर ही रहे। इसकी जगह वो लंबे समय के लिए बाजार से पैसा जुटाने की स्थिति में आए।
वहीं पाकिस्तान इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी की आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम को लागू कर रहा है। उसकी ये मदद 2024 में मंजूर हो गई थी। आईएमएफ के कार्यक्रम के अंतर्गत पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था में भी कई सुधार करने हैं। पाकिस्तान 2023 में डिफॉल्ट के काफी करीब पहुंच गया था। उस समय आईएमएफ और दूसरे देशों की मदद से उसको तत्काल राहत मिली थी। अब सरकार की यह कोशिश है कि दोबारा ऐसी स्थिति न बने जिससे देश की क्रेडिट रेटिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा अच्छा हो पाए।
10 अरब डॉलर की रखी गई है मांग
यदि अमेरिका से ये सुविधा मंजूर होगी तो पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा। इससे रुपये पर दबाव कम और अंतरराष्ट्रीय बाजार से पैसा जुटाने में भी मदद मिल सकती है। फिलहाल यहां पर सबसे बात यह है कि 10 अरब डॉलर मांग रखी है परंतु अमेरिका ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है। पाकिस्तान को आगे की बातचीत और अमेरिका के फैसला का भी इंतजार है।

