वाशिंगटनः अमेरिका ने वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को अब स्थायी बना दिया है। नए नियम के तहत कुछ देशों के नागरिकों को बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) वीजा मिलने से पहले 20,000 डॉलर यानि 17 लाख तक का बॉन्ड यानी सिक्योरिटी मनी जमा करनी पड़ सकती है। नया नियम 3 अगस्त से लागू हो रहा है।
इस नियम के लागू होने के बाद वीजा अधिकारियों को अधिकार मिल गया है कि वे जरूरत महसूस होने पर किसी भी पात्र आवेदक से वीजा जारी करने से पहले यह भारी-भरकम राशि जमा करवा सकते हैं। खास बात यह है कि पहले इस योजना में 5,000 डॉलर का भी एक विकल्प था, जिसे अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
ट्रंप प्रशासन का यह सख्त नियम फिलहाल दुनिया के 50 देशों के नागरिकों पर लागू किया गया है, जिनमें से सबसे ज्यादा देश अफ्रीकी महाद्वीप के हैं। हालांकि, भारतीय नागरिकों के लिए अभी बड़ी राहत की बात यह है कि भारत का नाम इस सूची में शामिल नहीं है। यानी भारतीयों को फिलहाल टूरिस्ट या बिजनेस वीजा के लिए कोई अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी नहीं देनी होगी। लेकिन, भारत के पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के नागरिकों को इस सूची में डाल दिया गया है। इसके साथ ही अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में अगर जरूरत पड़ी, तो अन्य देशों को भी इस सख्त नियम के दायरे में लाया जा सकता है।
दरअसल, अमेरिका ने इस वीजा बॉन्ड योजना को साल 2025 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य उन यात्रियों पर लगाम लगाना था, जो वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में ही डेरा जमाए रहते हैं।
अमेरिका सरकार का दावा है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे काफी अच्छे रहे हैं, इसलिए अब इसे स्थायी कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम जमा होने के डर से लोग अपनी वीजा शर्तों का सख्ती से पालन करेंगे और तय समय पर अपने देश लौट जाएंगे। दूसरी तरफ, इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन आम और असली यात्रियों पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो सिर्फ घूमने या जायज काम से अमेरिका जाना चाहते हैं।
