शिमला: जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव में सुबह भारी भूस्खलन हो गया। जांगलिख पुल के पास अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा, जिससे सड़क पूरी तरह मलबे और चट्टानों से भर गई और दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही रुक गई। इस दौरान सड़क से गुजर रहे कुछ लोगों ने समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। घटना के तुरंत बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, जांगलिख पुल के आसपास रविवार से ही पहाड़ी से रुक-रुककर पत्थर गिर रहे थे, जिससे खतरे का अंदाजा पहले ही हो गया था।
सोमवार सुबह अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटने से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा। इस भूस्खलन के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पहाड़ से भारी मलबा नीचे आते हुए देखा जा सकता है। इस भूस्खलन का असर पास की सुंदरू खड्ड पर भी पड़ा। पहाड़ी का मलबा गिरने से कुछ समय के लिए खड्ड का बहाव प्रभावित हो गया, जिससे स्थानीय लोगों में जलस्तर अचानक बढ़ने की चिंता पैदा हो गई। हालांकि, प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से न घबराने और सतर्क रहने की अपील की है। रोहड़ू के एसडीएम धर्मेश रमोत्रा ने बताया, “तहसीलदार चिड़गांव को मौके पर भेजा गया है।
सुंदरू खड्ड में मलबा गिरने से पानी का बहाव कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था, लेकिन अब पानी फिर से बहना शुरू हो गया है। खड्ड में झील बनने जैसी स्थिति नहीं है।” प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से जांगलिख क्षेत्र के साथ-साथ पब्बर नदी और आसपास की खड्डों के किनारे जाने से बचने की अपील की है। बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और किसी भी खतरे वाली जगह पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन मार्ग को बहाल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और संबंधित विभाग मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और बड़े पत्थर होने के कारण रास्ता खोलने से पहले क्षेत्र को सुरक्षित करना जरूरी है।
राहत की बात यह है कि इस घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पहाड़ी से रुक-रुककर गिर रहे पत्थरों के कारण खतरा अब भी बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है। सोमवार को शिमला और आसपास के क्षेत्रों में हुई हल्की बारिश ने पहाड़ी ढलानों को कमजोर कर दिया है, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है। जांगलिख पुल के पास हुई इस घटना से स्थानीय लोगों और यात्रियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। फिलहाल, प्रशासन सड़क मार्ग को साफ करने के साथ-साथ सुंदरू खड्ड के जलप्रवाह पर भी लगातार नजर बनाए हुए है।