जालंधर, ENS: पंजाब में गौं हत्या और समगलिंग के मामलों में लगातार बढ़ौतरी हो रही है। ऐसे में लगातार बढ़ रहे मामलों पर नकेेल कसने के लिए गौं रक्षा के वाइस चेयरमैन कीमत भगत ने राज्य भर के एसपी और डीएसपी के साथ मीटिंग की। इस दौरान दोषियों के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई करने की अपील की और पंजाब में देर रात गौं माता की समगलिंग को लेकर नाके लगाकर उक्त वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। मामले की जानकारी देते हुए गौं रक्षा के वाइस चेयरमैन कीमत भगत ने कहा कि पंजाब राज्य के गौं रक्षा सेल के एसपी और डीएसपी सहित अन्य अधिकारियों से मीटिंग की गई।
इस दौरान प्रत्येक जिले में एसपी और डीएसपी रैंक के 2-2 गौं सुरक्षा में लगे हुए है। ऐसे में गौं हत्या, गौं समगलिंग, गौं मांस सहित अन्य गैर कानूनी काम करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंजाब में बेजुबान जानवरों के साथ अत्याचार ना हो उसके लिए राज्यभर में मीटिंग की जा रही है। मीटिंग का मुख्य उद्देश्य लावारिस गौं माता पर रोक लगाना है। इससे कई लोग सड़क हादसे का शिकार हो रहे है और किसानों के खेतों को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में गौं सुरक्षा सेल के साथ सर्किट हाउस में मीटिंग रखी गई थी।
मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, सेशन कोर्ट के तहत नियमों के अनुसार गौं रक्षा के लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नियमों के अनुसार सजा को लेकर पत्र दिए गए। गौं हत्या में कोर्ट के आदेशानुसार 10 साल की कैद का प्रवाधान है। वहीं गौं मास की जांच के लिए पंजाब की लैब लाडोवाली रोड़ में बनाई गई। देर रात गौं मांस की स्मगलिंग पर नकेल कसने को लेकर मुद्दे उठाए गए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा गौं मांस पर नकेल कसने को लेकर सुझाव दिए गए। कीमती भगत ने कहा कि पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, पटियाला, फरीदकोट और पटियाला में गौं के केस अधिक है और इन जिलों में केस इसलिए बढ़ रहे है क्यों कि यह बॉर्डर एरिया है।
ऐसे में सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों से गौं रक्षा की अपील की गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई। इस दौरान गौं रक्षा मामले में पुलिस को दफ्तरों के बाहर कार्रवाई को लेकर गाइडलाइंस जारी करने की अपील की गई, जिससे शिकायत दर्ज करवाने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं को परेशानी का सामना ना करना पड़े। उन्होंने गौं रक्षा राष्ट्रीय दल के सतीष का हवाला देते हुए कहा कि उनके द्वारा एक साल में 15 मामले दर्ज करवाए गए। वहीं स्टोर में गौं मांस बिकने की घटना का हवाला दिया गया। इस दौरान गौं रक्षा को लेकर नए नियमों के तहत एक्ट लगाने को लेकर अपील की गई।

