जालंधर / Jalandhar, 26 February: पंजाब केसरी ग्रुप की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। Famous businessman Chander Aggarwal द्वारा दायर किए गए एक defamation case (मानहानि मामले) में माननीय अदालत ने आज ग्रुप के 5 डायरेक्टरों के खिलाफ अदालत में पेश न होने पर bailable warrants (जमानती वारंट) जारी कर दिए हैं। हालांकि, इसी मामले में 3 अन्य आरोपितों को जमानत प्रदान कर दी गई है।
अदालत के आदेश के अनुसार, पंजाब केसरी ग्रुप के Editor-in-Chief Vijay Kumar Chopra, डायरेक्टर Avinash Chopra, Amit Chopra, Abhijay Chopra और Arush Chopra के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए हैं। वहीं, Manisha Arora, Richa Sharma और Sanjay Kumar Gupta (CFO) को अदालत ने जमानत दे दी।
मामले की जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में प्रकाशित कथित रूप से भ्रामक समाचार रिपोर्टों के संबंध में यह विवाद शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता Chander Aggarwal, जो जालंधर के एक जाने-माने रियल एस्टेट व्यवसायी (Real Estate Developer)** बताए जाते हैं, ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ झूठी एवं निराधार खबरें प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और निवेशकों (investors) में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
बताया गया है कि जालंधर के 66 फुट रोड क्षेत्र में चल रहे उनके रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से जुड़ी खबरों को लेकर यह विवाद सामने आया। शिकायत में कहा गया कि इन रिपोर्टों का उद्देश्य कथित रूप से बदनामी फैलाना और अखबारी सुर्खियां बटोरना था।
इसी संबंध में Judicial Magistrate First Class, Jalandhar द्वारा पंजाब केसरी ग्रुप के मुख्य संपादक एवं निदेशकों सहित कुल आठ लोगों को अदालत में पेश होने के लिए तलब (summon) किया गया था। निर्धारित तिथि पर पेशी न होने के बाद अदालत ने प्रक्रिया के तहत जमानती वारंट जारी किए।
भ्रामक खबरों का कड़ा संज्ञान लेते हुए Chander Aggarwal ने पंजाब केसरी ग्रुप के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की और संबंधित व्यक्तियों — Vijay Kumar Chopra, Avinash Chopra, Amit Chopra, Abhijay Chopra, Arush Chopra, Manisha Arora, Richa Sharma एवं Sanjay Kumar Gupta — के खिलाफ अदालत में defamation suit दायर किया।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पहले भी माननीय हाईकोर्ट (High Court) में दायर एक याचिका को खारिज किया जा चुका है। इसके बाद दायर की गई review petition को भी दूसरी बार अदालत द्वारा डिसमिस कर दिया गया बताया जा रहा है।
मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन (sub judice) है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
