जालंधर, ENS: शहर से स्वास्थ्य सुविधाओं और निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता को उजागर करने वाला एक बेहद शर्मानाक मामला सामने आया है। दरअसल, श्रीराम अस्पताल में देर रात टीबी से पीड़ित 18 वर्षीय युवती के परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच भारी हंगामा। पीड़ित मां का आरोप है कि सरकारी सहायता की आस में वह सिविल अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें ‘श्री राम हॉस्पिटल’ के जाल में फंसा दिया गया। इसके बाद मामला सिर्फ भारी-भरकम बिल वसूलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इलाज के नाम पर भर्ती 18 साल की टीबी पीड़िता बच्ची के साथ मारपीट और उसकी लाचार मां के साथ डॉक्टरों द्वारा बदसलूकी व गाली-गलौज करने का संगीन आरोप लगा है।
पीड़िता का आरोप है कि श्रीराम अस्पताल प्रबंधन भारी-भरकम बकाया बिल मांगने के बहाने उनकी बेटी से मिलने नहीं दे रहा है और उनके साथ बदसलूकी की जा रही है। वहीं, परिजनों को आशंका है कि अंदर उनकी बच्ची की स्थिति गंभीर है या उसके साथ अनहोनी हो चुकी है। हंगामे को बढ़ता देख 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।
पीड़ित मां सबीना ने बताया कि उनकी 18 वर्षीय बेटी प्रीति को टीबी की समस्या थी। वे करीब चार दिन पहले उसे इलाज और रूटीन चेकअप के लिए सिविल अस्पताल से श्रीराम अस्पताल लेकर आए थे। उन्होने कहा कि बच्ची को सरकारी (सिविल) अस्पताल ले गई थी, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने झांसा देकर उसे प्राइवेट ‘श्री राम हॉस्पिटल’ भेज दिया। मां का आरोप है कि उन्होंने पहले ही दिन डॉक्टरों को बता दिया था कि वे गरीब परिवार से हैं और निजी अस्पताल का भारी-भरकम बिल चुकाने में सक्षम नहीं हैं।
इसके बावजूद डॉक्टरों ने मरीज को दाखिल कर लिया और चार दिनों के भीतर करीब 46 हजार रुपये का बिल बना दिया। जब परिजनों ने पैसे न होने की बात कही और बच्ची को डिस्चार्ज करने की गुहार लगाई, तो आरोप है कि डॉक्टरों और स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की। पीड़ित महिला का कहना है कि उन्हें और परिवार के अन्य सदस्यों को धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल स्टाफ पिछले कुछ समय से उन्हें मरीज से मिलने भी नहीं दे रहा है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपनी बेटी को देखने के लिए गिड़गिड़ा रही हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन बिना पैसों के बच्चे की छुट्टी करने से साफ इनकार कर रहा है। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल के अंदर से मरीज के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है, जिससे परिजनों को बच्ची की सुरक्षा को लेकर गहरी आशंका बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा है और अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है।