नई दिल्ली: ईरान स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पूरी तरह से नहीं खोलने देना चाहता। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने जो बारुदी सुरंगें बिछाई थी उनको अब वो ढूंढ नहीं पा रहा है। उन्हें हटाने की क्षमता भी उसमें नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह मुख्य कारण है कि ईरान ट्रंप प्रशासन की मांग को जल्दी पूरा नहीं कर पा रहा है। अमेरिका यह चाहता है कि इस जरुरी जलमार्ग से ज्यादा से ज्यादा जहाजों का आवगमन शुरु हो जाएगा।
यह समस्या शांति वार्ता के लिए भी मुश्किलें पैदा कर रही है। इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरानी लोग और अमेरिका के राष्ट्रपति जेडी वेंस के नृतत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के बीच में शांति बातचीत हो रही है। दोनों पक्ष युद्ध रोकने और स्थायी शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं परंतु हार्मुज इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
इस वजह से जरुरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ हार्मुज दुनिया का सबसे जरुरी जलमार्ग है। दुनिया का लगभग पांचवा हिस्सा यानी के कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर जाता है। यदि यह बंद हो गया तो जहाजों का आना-जाना कम जो जाएगा। पूरी दुनिया तेल की कीमतें आस-मान छूने लगती है। ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जबाव में छोटी नावों से इसी समुद्री रास्ते में स्ट्रेट ऑफ हार्मुज दुनिया का सबसे पांचवा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह बंद हो जाए या जहाजों का आवगमन कम हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान को छूने लगती हैं। ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के हमलोें के जवाब में छोटी नावों से इसी समुद्र रास्ते में बारुदी सुरंगें बिछाई।
इसके अलावा ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की धमकी भी दी। नतीजा यह हुआ कि तेल के टैंकर और दूसरों जहाजों का आवागमन लगभग रुक गया। इससे दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें बहुत बढ़ गई है। ईरान को युद्ध में यह सबसे बड़ा हथियार मिल गया। ईरान ने कुछ जहाजों को टोल फीस देकर एक संकरा रास्ता खुला रखा हुआ था लेकिन पूरा का पूरा समुद्री रास्ता सुरक्षित ही नहीं था।
ईरान के पास कई ज्यादा छोटी नावें है जो जहाजों को परेशान कर सकती है। यह नई बारुदी सुरंगें बिछा सकती है। अमेरिका ने ईरान की नौसेना के कई जहाज डुबो दिए और नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए लेकिन छोटी नावों को पूरी तरह से नष्ट करना मुश्किल है।
ट्रंप ने रखी यह मांग
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि – दो हफ्ते का सीजफायर तभी संभव होगा। जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रुप से खोल दिया जाए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सीमाओं का मतलब ही बारुदी सुरंगों को ढूंढना और हटाने में ईरान की असमर्थता है। अब इस्लामाबाद में चल रही बातचीत में यह मुद्दा मुख्य चर्चा का विषय होगा। अमेरिका ज्यादा जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की मांग रख रहा है वहीं ईरान दूसरी ओर अपनी तकनीकी समस्याएं बता रही हैं।
फरवरी मार्च 2026 में शुरु हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का नतीजा है। ईरान-अमेरिका का युद्ध शुरु हुए होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है। इससे पहले ईरान के सीनियर अधिकारी ने कहा था कि यदि कोई जहाज अंदर आएगा। उसे आग लगा दी जाएगी।
सिर्फ दो हफ्ते का हुआ सीजफायर
आपको बता दें कि अभी तक दो हफ्ते का ही सीजफायर हुआ है परंतु दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाया है। अमेरिका कह रही है कि ईरान सीजफायर की शर्तें पूरी नहीं कर रहा है। ईरान यह कह रहा है कि इजरायल लेबनान में हमले जारी रख रहा है।
होर्मुज का मुद्दा सुलझाना आसान नहीं है क्योंकि खदानें बिखरी हुई हैं। दोनों ओर खदानेें साफ करने की क्षमता सीमित है। यदि जल्दी सुरक्षित रास्ता खुल नहीं रहा तो तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती है।