चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने HKRNL पर विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के गठन के माध्यम से प्रदेश सरकार ने दशकों पुरानी ठेकेदार आधारित कर्मचारी व्यवस्था में व्याप्त बिचौलियापन, दलाली, शोषण और अपारदर्शिता को खत्म कर इसे पारदर्शी, उत्तरदायी और कर्मचारी-केंद्रित बनाया है।
झूठ बोलने और भ्रम फैलाने में विपक्ष सबसे आगे, हवा से भी तेज फैलाते हैं झूठ
झूठ बोलने और भ्रम फैलाने में कांग्रेस के लोग सबसे आगे हैं। ये हवा से भी तेज गति से झूठ फैलाने का काम करते हैं। प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और सच तथा झूठ के अंतर को भली-भांति समझती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का तो ऐसा था कि चुनाव आ गया तो ये लोग वोटों के हिसाब से सरकार चलाते थे।
मुझे इस बात की चिंता है कि कांग्रेस के विधायक उस व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं, जो इनके शासनकाल में दम तोड़ चुकी थी और दलदल में फंस गई थी। हमारी सरकार ने उस व्यवस्था को ठीक करने का काम किया है। यह भी चिंता का विषय है कि विपक्ष के सदस्य उसी दफ्तर के आगे जाकर बैठ गए, जहां हमारी सरकार ने व्यवस्था को दुरुस्त किया है।
वर्ष 1967 में भी थे 11,397 कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाले कर्मचारी
नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा गठन के बाद वर्ष 1967 के प्रारंभिक आंकड़ों को देखें तो 31 मार्च, 1967 को हरियाणा सरकार के कर्मचारियों की कुल संख्या 97,385 थी। इनमें कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाले 11,397 कर्मचारी शामिल थे।
कांग्रेस के 9 वर्षों में संयुक्त श्रेणी में करीब 71 हजार कर्मचारियों की हुई वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1967 से 2005 तक 38 वर्षों में कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी की संख्या 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई लेकिन कांग्रेस सरकार के अगले 9 वर्षों, वर्ष 2005 से 2014 के दौरान यह संख्या 38,949 से बढ़कर लगभग 1 लाख 10 हजार तक पहुंच गई। यानी 38 वर्षों में इस श्रेणी में 27,552 कर्मचारियों की वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस के मात्र 9 वर्षों में लगभग 71 हजार की वृद्धि हुई।
उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि कांग्रेस के मात्र 9 वर्षों में लगभग 71 हजार कर्मचारी क्यों बढ़ाए गए? इन कर्मचारियों को ठेकेदारों के भरोसे क्यों छोड़ा गया? ईपीएफ, ईएसआई, समान वेतन, प्रसूति अवकाश, अनुकम्पा तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्थित नीति उस समय क्यों नहीं बनाई गई?