पंचकूला। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने साल 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। यह मामला हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आग लगाने से जुड़ा था।
क्या है पूरा मामला
यह घटना फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई थी। आंदोलन के समय रोहतक में हिंसा भड़क गई थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने दिल्ली बाईपास स्थित कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर हमला कर दिया और उसे आग के हवाले कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी, जिसने कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट का फैसला क्या रहा
पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में कुल 60 आरोपियों पर सुनवाई की। कोर्ट ने 56 आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया। तीन आरोपी जिन्में विजेंद्र, प्रदीप और सुमित की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। एक आरोपी धर्मेंद्र हुड्डा को कोर्ट ने प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (पीओ) घोषित किया है, जो फिलहाल फरार है।
जेल में बंद आरोपी की रिहाई संभव
इस केस में रोहतक के खेड़ी साधी गांव का रहने वाला एक आरोपी प्रदीप जेल में बंद था। कोर्ट के फैसले के बाद उसे आज रिहा किया जा सकता है।
कैप्टन अभिमन्यु की आई प्रतिक्रिया
पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं।