चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेशभर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए ईंधन संरक्षण और ऊर्जा बचत के आह्वान पर कार्रवाई करते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों तथा सरकारी विभागों से दैनिक सरकारी कार्यप्रणाली में ईंधन दक्षता संबंधी उपायों को सक्रिय रूप से अपनाने का आह्वान किया है।
हरियाणा के सभी उपायुक्तों को जारी पत्र में डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की कि वे ऐसे व्यावहारिक एवं प्रभावी कदम अपनाएं, जिनसे ईंधन की खपत तथा कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।
इस पहल के तहत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को व्यक्तिगत वाहनों के बजाय दैनिक आवागमन के लिए मेट्रो, बस एवं रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया है। साथ ही, कारपूलिंग एवं राइड-शेयरिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ईंधन की बचत के साथ-साथ यातायात दबाव भी कम किया जा सके। विभागों को साझा यात्रा व्यवस्था के लिए डिजिटल समन्वय प्लेटफॉर्म एवं व्हाट्सऐप समूहों का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
स्वस्थ एवं पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देते हुए डॉ. मिश्रा ने कम दूरी की यात्राओं के लिए पैदल चलने एवं साइकिल चलाने की भी सलाह दी गई। एडवाइजरी में अनावश्यक सरकारी दौरों, हवाई यात्राओं एवं विदेश यात्राओं को न्यूनतम रखने तथा एक ही यात्रा में अनेक सरकारी कार्यों को पूरा करने पर बल दिया गया है।
अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य स्वच्छ तकनीकों एवं डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देना भी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाए ताकि अनावश्यक यात्रा एवं ईंधन खपत को कम किया जा सके। साथ ही, भविष्य में सरकारी खरीद में इलेक्ट्रिक वाहनों एवं ईंधन दक्ष वाहनों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। सरकारी परिसरों में रहने वाले कर्मचारियों को घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि यदि विभागों एवं जिलों में छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास सामूहिक रूप से अपनाए जाएं तो वे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता तथा प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा योगदान दे सकते हैं। यह पहल हरियाणा को हरित, स्वच्छ एवं ऊर्जा दक्ष राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो सतत विकास के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
