नैनीतालः उतराखंड में नैनीताल के मनोरा रेंज के जंगल 70 घंटों से आग से धधक रहे है। हालांकि प्रशासन द्वारा लगातार आग पर काबू पाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। लगातार फैल रही आग के कारण पूरे क्षेत्र में धुएं का घना गुबार छाया हुआ है। इससे स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश और घुटन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आग के आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। आग से कई हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, और वन्यजीवों पर संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पंचायत सदस्य हिमांशु पांडे ने कहा कि पिछले 3 दिन से मनोरा रेंज के जंगल धधक रहे हैं। इससे साफ है कि वन विभाग की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित थीं। विभाग की लापरवाही से जंगल जलकर राख हो रहे हैं। वहीं वन क्षेत्रिय अधिकारी नीतिन पंत ने कहा कि क्षेत्र में तीन दिनों से आग लगी है। विभागीय टीम मौके पर मौजूद है। दमकल विभाग के सहयोग से आग बुझाने का कार्य लगातार किया जा रहा है। साथ ही आग लगाने वालों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, हालांकि कुछ स्थानों पर अब भी धुआं उठ रहा है।
बता दें कि रविवार सुबह बल्दियाखान के समीप नैनागांव क्षेत्र में जंगल में आग लगी थी। इसके बाद आग धीरे-धीरे कलौना, पटवाडांगर और आरुखान क्षेत्र तक फैल गई। तेज धूप और हवाओं के चलते आग लगातार भड़कती रही। मंगलवार तक भी आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। नैनागांव, बल्दियाखान, पटवाडांगर और आरुखान समेत आधा दर्जन गांवों से लगे वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुके हैं। आग से कई हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। चीड़, बांज, बुरांश सहित अन्य वनस्पतियां जलकर नष्ट हो रही हैं। जंगल की आग से वन्यजीवों पर भी संकट गहरा गया है।
पक्षियों, खरगोश, कांकड़, घुरड़ समेत कई छोटे जीव-जंतु आग और धुएं से प्रभावित हो रहे हैं। घने धुएं के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दमा के मरीजों के लिए हालात अधिक गंभीर बने हुए हैं। कई इलाकों में दृश्यता भी प्रभावित हो रही है। हालांकि वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर ग्रामीण भी वन कर्मियों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज हवाओं और सूखी वनस्पतियों के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लोगों ने जंगलों में लगातार हो रही आग की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
