ऊना ,सुशील पंडित: जिन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया या जो विशेष देखभाल और संरक्षण के मोहताज हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना जीवन का मजबूत संबल बन रही है। योजना के तहत ऊना जिले में अब तक 471 बच्चों को विभिन्न घटकों के माध्यम से करीब पांच करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। शिक्षा, सुरक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जुड़ी सुविधाओं के माध्यम से इन बच्चों को सम्मानजनक जीवन की नई दिशा मिल रही है।
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा देकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है।
विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों को मिला संरक्षण
यह योजना उन बच्चों के लिए है जिन्हें विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता होती है। इसमें अनाथ, अर्ध-अनाथ, विशेष रूप से सक्षम बच्चे तथा विधिक संरक्षण के अधीन आए बच्चे शामिल हैं। योजना का उद्देश्य उन्हें स्थायी आर्थिक और सामाजिक आधार उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
योजना के तहत पात्र बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक संस्थागत संरक्षण प्रदान किया जाता है। भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाती है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए सरकार ही माता है, सरकार ही पिता है।
शिक्षा और सपनों को मिला नया आधार
योजना के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को चार हजार रुपये मासिक पॉकेट मनी दी जाती है। बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे 14 वर्ष तक के बच्चों के खातों में एक हजार रुपये तथा 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 2,500 रुपये प्रतिमाह जमा किए जाते हैं।
उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को, यदि छात्रावास उपलब्ध नहीं है, तो तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता दी जाती है। विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण और एक्सपोजर विजिट का लाभ भी दिया जाता है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करती है।
सम्मानजनक जीवन की दिशा में व्यापक पहल
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत विवाह के लिए दो लाख रुपये की सहायता, आवास निर्माण के लिए तीन बिस्वा भूमि और तीन लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये वार्षिक वस्त्र अनुदान और 500 रुपये उत्सव भत्ता भी दिया जाता है।
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना का दायरा हुआ व्यापक
समावेशन की दृष्टि से योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। असहाय बुजुर्गों, ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त या सरेंडर किए गए बच्चों और एकल नारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें स्थायी आर्थिक सहारा दिया जा सके और वे सम्मानजनक जीवन जिएं।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष के लिए बढ़ा सहयोग
राज्य सरकार ने इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष की स्थापना की है। इसमें सरकारी अंशदान के साथ-साथ आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों की उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य आवश्यकताओं को दीर्घकालिक आधार पर पूरा करना है।
ऊना जिले में योजना के प्रभावशाली परिणाम
जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना हरीश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक जिले में 471 बच्चों को विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 4.99 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। इनमें 289 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा सहायता के रूप में 3 करोड़ 2 लाख 45 हजार 171 रुपये दिए गए। उच्च शिक्षा के लिए 29 विद्यार्थियों को 36 लाख 42 हजार 450 रुपये तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 18 युवाओं को 8 लाख 6 हजार 621 रुपये उपलब्ध कराए गए।
कोचिंग सहायता के तहत दो विद्यार्थियों को 1 लाख 48 हजार रुपये, स्किल डेवलपमेंट के लिए एक युवक को 98 हजार रुपये तथा माइक्रो स्टार्टअप शुरू करने के लिए 10 युवाओं को 34 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त 36 युवाओं को विवाह सहायता के रूप में 72 लाख रुपये तथा 34 युवाओं को मकान निर्माण के लिए 40 लाख 50 हजार रुपये प्रदान किए गए। वहीं 50 बच्चों को वस्त्र अनुदान एवं उत्सव भत्ते के रूप में 80 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए।
हरीश मिश्रा ने बताया कि विभाग का प्रयास बच्चों को संरक्षण देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सम्मान को एक साथ जोड़कर योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जिला प्रशासन की प्राथमि बेसहारा बच्चों का संबल बनी मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना
के 471 बच्चों को मिला योजना का लाभ, करीब 5 करोड़ रुपये की सहायता
ऊना ,सुशील पंडित: जिन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया या जो विशेष देखभाल और संरक्षण के मोहताज हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना जीवन का मजबूत संबल बन रही है। योजना के तहत ऊना जिले में अब तक 471 बच्चों को विभिन्न घटकों के माध्यम से करीब पांच करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। शिक्षा, सुरक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जुड़ी सुविधाओं के माध्यम से इन बच्चों को सम्मानजनक जीवन की नई दिशा मिल रही है।
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा देकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है।
विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों को मिला संरक्षण
यह योजना उन बच्चों के लिए है जिन्हें विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता होती है। इसमें अनाथ, अर्ध-अनाथ, विशेष रूप से सक्षम बच्चे तथा विधिक संरक्षण के अधीन आए बच्चे शामिल हैं। योजना का उद्देश्य उन्हें स्थायी आर्थिक और सामाजिक आधार उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
योजना के तहत पात्र बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक संस्थागत संरक्षण प्रदान किया जाता है। भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाती है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए सरकार ही माता है, सरकार ही पिता है।
शिक्षा और सपनों को मिला नया आधार
योजना के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को चार हजार रुपये मासिक पॉकेट मनी दी जाती है। बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे 14 वर्ष तक के बच्चों के खातों में एक हजार रुपये तथा 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 2,500 रुपये प्रतिमाह जमा किए जाते हैं।
उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को, यदि छात्रावास उपलब्ध नहीं है, तो तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता दी जाती है। विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण और एक्सपोजर विजिट का लाभ भी दिया जाता है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करती है।
सम्मानजनक जीवन की दिशा में व्यापक पहल
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत विवाह के लिए दो लाख रुपये की सहायता, आवास निर्माण के लिए तीन बिस्वा भूमि और तीन लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये वार्षिक वस्त्र अनुदान और 500 रुपये उत्सव भत्ता भी दिया जाता है।
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना का दायरा हुआ व्यापक
समावेशन की दृष्टि से योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। असहाय बुजुर्गों, ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त या सरेंडर किए गए बच्चों और एकल नारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें स्थायी आर्थिक सहारा दिया जा सके और वे सम्मानजनक जीवन जिएं।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष के लिए बढ़ा सहयोग
राज्य सरकार ने इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष की स्थापना की है। इसमें सरकारी अंशदान के साथ-साथ आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों की उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य आवश्यकताओं को दीर्घकालिक आधार पर पूरा करना है।
ऊना जिले में योजना के प्रभावशाली परिणाम
जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना हरीश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक जिले में 471 बच्चों को विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 4.99 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। इनमें 289 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा सहायता के रूप में 3 करोड़ 2 लाख 45 हजार 171 रुपये दिए गए। उच्च शिक्षा के लिए 29 विद्यार्थियों को 36 लाख 42 हजार 450 रुपये तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 18 युवाओं को 8 लाख 6 हजार 621 रुपये उपलब्ध कराए गए।
कोचिंग सहायता के तहत दो विद्यार्थियों को 1 लाख 48 हजार रुपये, स्किल डेवलपमेंट के लिए एक युवक को 98 हजार रुपये तथा माइक्रो स्टार्टअप शुरू करने के लिए 10 युवाओं को 34 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त 36 युवाओं को विवाह सहायता के रूप में 72 लाख रुपये तथा 34 युवाओं को मकान निर्माण के लिए 40 लाख 50 हजार रुपये प्रदान किए गए। वहीं 50 बच्चों को वस्त्र अनुदान एवं उत्सव भत्ते के रूप में 80 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए।
हरीश मिश्रा ने बताया कि विभाग का प्रयास बच्चों को संरक्षण देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सम्मान को एक साथ जोड़कर योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जिला प्रशासन की प्राथमिकता : कोई पात्र बच्चा न छूटे
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।
कता : कोई पात्र बच्चा न छूटे
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।
