.
Punjab Govtभगवंत मान सरकार ने नशा पीड़ितों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने...

भगवंत मान सरकार ने नशा पीड़ितों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने के लिए ‘कम्युनिटी ब्रिज मॉडल’ किया शुरू

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

कम्युनिटी ब्रिज मॉडल के तहत पंजाब भर में नशा पीड़ितों के लिए 90 दिनों का ढांचागत पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा: डा. बलबीर सिंह

चंडीगढ़: भगवंत मान सरकार कम्युनिटी ब्रिज मॉडल (सी.बी.एम.) शुरू करने जा रही है, जो 90 दिनों का ढांचागत, समाज-आधारित पुनर्वास कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत नशा मुक्ति केंद्र से होगी और मरीज के घर तक पहुंच बनाई जाएगी। मरीज को चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किए जाने के बाद भी उसका इलाज पेशेवर निगरानी में घर पर ही जारी रहेगा।

यह पहल ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के तहत नशों के खिलाफ चल रही लड़ाई को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य नशे की लत से उभर रहे व्यक्तियों को इलाज के बाद भी योजनाबद्ध और निरंतर सहायता प्रदान करना है। नशा मुक्ति केंद्रों में डिटॉक्सीफिकेशन पूरा करने के बाद मरीजों को आमतौर पर पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाता है। जहां कई मरीज अपना इलाज जारी रखते हैं, लेकिन कई अपने घर वापस चले जाते हैं, जहां पहले निरंतर इलाज सुनिश्चित करना मुश्किल था या ऐसी कोई व्यवस्था ही मौजूद नहीं थी। अब कम्युनिटी ब्रिज मॉडल के तहत नशा मुक्ति केंद्र में इलाज पूरा करने के बाद मरीज अपने समुदाय में रहते हुए टेली-काउंसलिंग और परिवार की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अपनी रिकवरी जारी रखेंगे। इससे न केवल इलाज की निरंतरता बनी रहेगी बल्कि पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ेगी।

यह पहल इलाज की सबसे बड़ी चुनौती—डिस्चार्ज के बाद देखभाल की निरंतरता बनाए रखने और मरीजों को पुनः नशों की ओर जाने से रोकने—को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कम्युनिटी ब्रिज मॉडल एक चरणबद्ध और सुचारू प्रक्रिया पर आधारित है। सबसे पहले मरीज नशा मुक्ति केंद्र में चिकित्सकीय निगरानी में डिटॉक्सीफिकेशन करवाता है। इसके बाद जब डॉक्टर उसे चिकित्सकीय रूप से डिस्चार्ज के लिए योग्य घोषित कर देते हैं तो उसे केंद्र से छुट्टी दे दी जाती है।

कम्युनिटी या घर-आधारित पुनर्वास की शुरुआत डिस्चार्ज से एक दिन पहले ही हो जाती है। इस दौरान मरीज के परिवार के लिए अनिवार्य साइको-एजुकेशन सत्र करवाया जाता है ताकि वे घर में मरीज के पूरी तरह ठीक होने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। अगले 30 दिनों तक मरीज की सप्ताह में तीन से चार टेली-काउंसलिंग कॉल के माध्यम से काउंसलिंग की जाएगी। इस दौरान समय-समय पर अनिवार्य डोप टेस्ट भी किए जाएंगे। यदि किसी मरीज का डोप टेस्ट पॉजिटिव आता है तो मनोचिकित्सक द्वारा उसकी पुनः समीक्षा करके अगले इलाज के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

इसके बाद अगले डेढ़ महीने के रख-रखाव चरण के दौरान टेली-काउंसलिंग सप्ताह में एक या दो बार की जाएगी। तीन महीने पूरे होने पर यह कार्यक्रम संपन्न हो जाएगा। इस दौरान मरीज की समग्र प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा और अंतिम अनिवार्य डोप टेस्ट भी किया जाएगा। इस मॉडल में तीन स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप और निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि मरीज निरंतर रिकवरी प्रक्रिया से जुड़ा रहे। यदि कोई मरीज काउंसलिंग सत्र में उपस्थित नहीं होता है तो सबसे पहले काउंसलर द्वारा उससे संपर्क किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सुपरवाइज़र का हस्तक्षेप और परिवार को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। यदि मरीज के पुनः नशों की ओर जाने या किसी गंभीर सुरक्षा संबंधी चिंता की पुष्टि होती है तो उसे पुनः नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा, “कम्युनिटी ब्रिज मॉडल पंजाब की नशा विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण कदम है। यह नशा मुक्ति केंद्रों तक सीमित इलाज से आगे बढ़कर मरीजों को उनके अपने समुदाय में लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने की दिशा में काम करेगा। इससे न केवल मरीजों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रहने में मदद मिलेगी बल्कि नशा-मुक्ति सेवाओं की कारगुज़री भी बढ़ेगी और अधिक से अधिक मरीज इन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।”

सी.बी.एम. को इस तरह तैयार किया गया है कि मरीज की रिकवरी पेशेवर निगरानी में जारी रहे और घर वापस जाने के बाद भी परिवार और समर्पित टेली-काउंसलरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस समय सरकार अमृतसर, होशियारपुर, मोगा और मोहाली जिलों में इस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चला रही है।

वर्तमान समय में पंजाब में 56 सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र और 540 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक चल रहे हैं। बड़ी संख्या में नशा पीड़ितों का इलाज पारंपरिक इलाज प्रणाली से किया जाता है। यह देखा गया कि डिटॉक्सीफिकेशन सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद कई मरीज बिना किसी संरचित और निगरानी वाले पुनर्वास कार्यक्रम के घर वापस चले जाते थे, जिससे उनके पुनः नशे की लपेट में आने का खतरा बढ़ जाता था। दूसरी ओर, चिकित्सकीय रूप से ठीक हो चुके मरीजों का लंबे समय तक केंद्रों में रहना नए मरीजों के लिए बिस्तरों की उपलब्धता को भी प्रभावित करता था। कम्युनिटी ब्रिज मॉडल इस महत्वपूर्ण कमी को दूर करते हुए न केवल इलाज की निरंतरता सुनिश्चित करेगा बल्कि इलाज केंद्रों की क्षमता में भी वृद्धि करेगा।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

Advertisement

Related Articles

Hot this week

Haryana News: महिला से सोने का लॉकेट झपटने वाले 2 शातिर काबू, देखें वीडियो

पंचकूलाः क्राइम ब्रांच-2 की टीम ने सेक्टर-7 क्षेत्र में...

Haryana News: सोने की चुड़ियां चुराने वाला आरोपी उत्तराखंड से काबू, देखें वीडियो

पंचकूलाः पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन द्वारा हाल ही...

S.I.R 2026: पंजाब में ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित: Anindita Mitra

मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक...

हरियाणा कैबिनेट ने निजी कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के नियमों को दी मंजूरी

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता...

Haryana News: महिला से सोने का लॉकेट झपटने वाले 2 शातिर काबू, देखें वीडियो

पंचकूलाः क्राइम ब्रांच-2 की टीम ने सेक्टर-7 क्षेत्र में महिला से सोने का लॉकेट झपटने की वारदात को सुलझाते...

Haryana News: सोने की चुड़ियां चुराने वाला आरोपी उत्तराखंड से काबू, देखें वीडियो

पंचकूलाः पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन द्वारा हाल ही में आयोजित क्राइम मीटिंग में सभी पुलिस टीमों को चोरी...

S.I.R 2026: पंजाब में ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित: Anindita Mitra

मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ड्राफ्ट मतदाता सूची सौंपी चंडीगढ़: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित...

हरियाणा कैबिनेट ने निजी कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के नियमों को दी मंजूरी

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में 'हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण...