ऊना में आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा जयंती पर लेखक संगोष्ठी व कवि सम्मेलन
ऊना,सुशील पंडित: हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी की ओर से सोमवार को लता मंगेशकर कला केंद्र, समूरकलां में आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। समारोह में आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा के साहित्य, संस्कृत भाषा और हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत में योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
हिमाचल संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव एवं संस्कृत विद्वान डॉ. मस्त राम ने कहा कि आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा का हिमाचल की संस्कृति तथा संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्य दिवाकरदत्त का कार्य हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
समारोह में राजकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रमेश शर्मा ने ‘ज्योतिषशास्त्रे आचार्यदिवाकरदत्तस्यावदानम्’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। डॉ. मदन मोहन और जगत प्रकाश ने भी आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान पर अपने विचार रखे।
समारोह के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों शांति कुमार स्याल, डॉ. नाथधर द्विवेदी, कुंदन लाल, ओम कुमार शर्मा, कृष्ण लद्दाखी, कुलदीप शर्मा, अशोक कालिया, रामपाल, अलका चावला, ओंकार प्रसाद, डॉ. रत्न चंद रत्नाकर, बालकृष्ण सोनी तथा अकादमी सदस्य जाहिद अबरोल ने कविता पाठ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. ओम दत्त सरोच ने की।
समारोह में आचार्य दिवाकरदत्त शर्मा के पौत्र एडवोकेट विरोचन शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. अमित कुमार सरोच ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम के समापन पर जिला भाषा अधिकारी निक्कू राम ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अकादमी के अनुसंधान अधिकारी स्वतंत्र कौशल, पुस्तकालयाध्यक्ष अनिल कुमार तथा रविंद्र कुमार भी उपस्थित रहे।