लुधियानाः जामा मस्जिद में शहर भर के मुस्लिम समुदाय के प्रमुख सदस्यों की एक बैठक हुई। ये बैठक पंडित धीरेंद्र शास्त्री की ओर से दी सफाई के बाद शांति और आपसी भाईचारे की दुआ के साथ खत्म हुई। लोगों को संबोधित करते पंजाब के शाही इमाम, मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने उस संदेश का जिक्र किया जो उन्होंने दो दिन पहले प्रेस के जरिए दिया था ये संदेश शहर में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान इस्लाम के बारे में की टिप्पणियों के बाद दिया गया था। जिसमें कहा गया था कि अगर वे शब्द वापस ले लिए जाएं तो बेहतर होगा।
शाही इमाम ने बताया कि कल रात सोशल मीडिया के जरिए दूसरी तरफ से भी एकता और सभी धर्मों के सम्मान को बढ़ावा देने वाला संदेश मिला, जो बड़ी समझदारी और परिपक्वता दिखाता है। जिसके बाद बैठक में उस स्थिति को सुलझाने का फैसला किया जो उस घटना के बाद पैदा हुई थी। शाही इमाम ने कहा कि उनका एकमात्र मकसद शांति और आपसी भाईचारा बनाए रखते हुए अपने-अपने समुदायों में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के मिल-जुलकर रहने का गवाह रहा है।
लोगों को संबोधित करते शाही इमाम ने बाबा जी से मिले सकारात्मक जवाब का स्वागत किया और साथ ही कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए नफरत फैलाने की कोशिशों की निंदा की। उन्होंने कहा कि लुधियाना जामा मस्जिद की ओर से जारी बयान में सम्मानजनक लहजा अपनाया गया था और बदले में मिला जवाब भी उतना ही सौहार्दपूर्ण और भाईचारे वाला था। शाही इमाम मौलाना उस्मान लुधियानवी ने शहर भर की दर्जनों मस्जिदों के इमामों और अध्यक्षों के साथ-साथ विभिन्न मुस्लिम संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम युवा नेताओं का धन्यवाद किया, जो बैठक में शामिल हुए थे। उन्होंने न केवल शहर में आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए दुआ की, बल्कि साफ तौर पर कहा कि लुधियाना लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता का प्रतीक रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस शहर को एक ऐसे सौहार्दपूर्ण गुलदस्ते के रूप में बनाए रखना सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है, जहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। शाही इमाम ने बताया कि लुधियाना के मुसलमानों का एक प्रतिनिधिमंडल आज एडिशनल पुलिस कमिश्नर रूपिंदर सिंह से मिला और उनसे अनुरोध किया कि भविष्य में लुधियाना में किसी भी धर्म के धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जाएं कि कोई भी धर्मगुरु किसी धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी न करे। उन्होंने पूरी स्थिति को बहुत समझदारी से संभालने के लिए ज़िला और पुलिस प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया।