जालंधर, ENS: फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हिंसा और पटियाल में चितकारा यूनिवर्सिटी में हुए हंगामे के बाद पंजाब महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुए बवाल को लेकर कपूरथला के डिप्टी कमिश्नर और वरिष्ठ एसएसपी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे FIR की कॉपी, विशेष जांच टीम (SIT) के गठन और अब तक की जांच की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने परिसर के भीतर छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन से विस्तृत जवाब तलब किया है।
इसी के साथ ही गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी भी तलब की गई है। हंगामे के बाद यूनिवर्सिटी ने 10 दिन की छुट्टी घोषित कर दी है। मिड-टर्म परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। जो छात्र घर जाना चाहते हैं, उन्हें अपने अभिभावकों को बुलाने के लिए कहा गया है। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट मीडिया पर हॉस्टल में सुरक्षा में चूक और छात्राओं के आरोपों से जुड़े कई वीडियो तेजी से फैल रहे हैं, जिसे लेकर आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने पुलिस विभाग से पूछा है कि परिसर के हॉस्टलों के अंदर छात्राओं की सुरक्षा के क्या पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का सच क्या है। महिला आयोग ने इस पूरे घटनाक्रम में अब तक की गई पुलिस कार्रवाई और जांच रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक आयोग पेश करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
वहीं चितकारा यूनिवर्सिटी को लेकर पंजाब राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2001 की धारा 12 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सूटो मोटो नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया हैकि यह मामला विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से पंजाब राज्य महिला आयोग के संज्ञान में आया है कि चितकारा विश्वविद्यालय, राजपुरा, जिला पटियाला के छात्रों द्वारा कुछ छात्राओं के बारे में कुछ अप्रमाणित समाचार/अफवाहें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस बीच, छात्रों ने कुछ छात्राओं के लापता होने और कथित अप्रिय घटना पर चिंता व्यक्त की।
पुलिस को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी भी छात्र की मौत/आत्महत्या की किसी भी घटना से इनकार किया है और इन दावों को अप्रमाणित/अफवाह करार दिया है। इसके बावजूद, छात्राओं की सुरक्षा और विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना एक गंभीर मामला है। इसलिए, पंजाब राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2001 के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए, निम्नलिखित जानकारी/रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक आयोग को भेजी जानी चाहिए।