लुधियानाः एल्डिको के पास 28 नवंबर 2021 को ढाई साल की बच्ची को जिंदा दफनाने के केस में पड़ोसन की फांसी की सजा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, अब उसे 30 साल जेल में रहना होगा और इस दौरान उसे कोई छूट नहीं मिलेगी। करीब 2 साल पहले सेशन कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। बच्ची के पिता अपने बच्चों के लिए खिलौने और दूसरी चीजें लाते थे, जिन्हें देखकर महिला के बच्चे भी मांग करते थे। वह इन मांगों को पूरा नहीं कर पाती थी। इसी रंजिश के चलते उसने बच्ची को निशाना बनाया। दरअसल, शिमलापुरी में पुलिस के हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह अपने परिवार और ढाई साल की मासूम बेटी दिलरोज कौर के साथ रहते थे। उनके ठीक पड़ोस में नीलम नाम की एक तलाकशुदा महिला (38) अपने दो बेटों के साथ रहती थी।
दोनों परिवारों के बीच अक्सर छोटी-मोटी बातों और बच्चों को लेकर मामूली विवाद होता रहता था। हरप्रीत सिंह अपने बच्चों के लिए अक्सर अच्छे खिलौने, कपड़े और तोहफे लाया करते थे। नीलम के बच्चे भी उन चीज़ों को देखकर वैसी ही मांग करते थे, जिन्हें नीलम पूरा नहीं कर पाती थी। इस वजह से नीलम के मन में हरप्रीत के परिवार के प्रति गहरी हीन भावना पैदा हो गई। उसने इस जलन का बदला लेने के लिए एक खौफनाक साजिश रची। जिसका किसी को अंदाजा भी नहीं था। कि वह ऐसा भी कर सकती है।
दरअसल, 28 नवंबर को महिला बच्ची को एक्टिवा पर बैठाकर एल्डिको के पास सुनसान जगह ले गई और जहां उसने पहले से एक गड्ढा खादे रहा था, उसमें उसे जिंदा दफना दिया। बच्ची के लापता होने के बाद सीसीटीवी में वह उसे ले जाती खिली। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल किया और उसकी निशानदेही पर बच्ची बरामद हुई। दो साल पहले सेशन कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई, तो वह जज के सामने रोने लगी और कहा- था- जज साहब, प्लीज मुझे बख्श दो। मेरे भी दो बच्चे हैं। हालांकि सेशन कोर्ट ने उस वक्त कोई भी नर्मी नहीं बरती थी। इधर, बच्ची का परिवार शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।