चंडीगढ़: हरियाणा में आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों को और मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत भावनात्मक परेशानी की शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, समय पर पेशेवर हस्तक्षेप और चौबीसों घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने आत्महत्या रोकथाम माह के अवसर पर दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यस्थलों पर जागरूकता और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम को केवल मानसिक बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए व्यापक जनस्वास्थ्य दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन सभी को भावनात्मक परेशानी की शुरुआती पहचान कर लोगों को उचित सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करना चाहिए।
इस वर्ष आत्महत्या रोकथाम के लिए निर्धारित थीम ‘चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड’ (आत्महत्या के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव) है। इसका उद्देश्य चुप्पी, कलंक और गलत धारणाओं की जगह खुलकर बात करने, करुणा, समझ और समय पर सहायता लेने की भावना को बढ़ावा देना है। डॉ. मिश्रा ने कहा, “परिवारों और समुदायों के लिए संदेश सरल है: भावनात्मक परेशानी को नजरअंदाज न करें, बिना किसी पूर्वाग्रह के व्यक्ति की बात सुनें और उसे पेशेवर सहायता तक पहुंचने में मदद करें। कभी-कभी, एक संवेदनशील बातचीत किसी की जान बचाने की दिशा में पहला कदम हो सकती है।”