चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के आई.सी.एस.एस.आर. सेमिनार हॉल में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रो. भीम एस. दहिया के सम्मान में ‘फेस्टश्रिफ्ट: ए ट्रिब्यूट टू द एकेडमिक लीडरशिप एंड मेंटरशिप ऑफ प्रो. भीम एस. दहिया’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक प्रख्यात विद्वान, आलोचक, साहित्यिक शिक्षक और प्रशासक प्रोफेसर भीम एस. दहिया के जीवन, विद्वत्ता, गतिशील नेतृत्व और प्रेरणादायक मार्गदर्शन को समर्पित है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. भीम एस. दहिया ने इस पुस्तक को तैयार करने के लिए अपने सहयोगियों, विद्यार्थियों और संपादकीय टीम का तहेदिल से धन्यवाद किया। उन्होंने अपने अकादमिक सफर को याद करते हुए आधुनिक शिक्षा में आलोचनात्मक चिंतन, मार्गदर्शन और नैतिक नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। समारोह में पंजाब विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. शेली वालिया ने मुख्य अतिथि के रूप में तथा ई.एफ.एल.यू., हैदराबाद के पूर्व कुलपति डॉ. अभय मौर्य ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी, नारनौल के पूर्व कुलपति डॉ. आर.सी. कुहाड़ ने की।
इस अवसर पर प्रो. के.के. गौतम, प्रो. अक्षय, प्रो. पंकज शर्मा और डॉ. उज्ज्वल शर्मा ने संबोधित किया तथा अकादमिक विचार साझा किए। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव सुनाए और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. दहिया के गहरे प्रभाव को उजागर किया। अर्नेस्ट हेमिंग्वे के प्रमुख विद्वान के रूप में पहचाने जाने वाले प्रो. दहिया ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी से अपनी पीएच.डी. पूरी की, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘टैफ्ट फेलोशिप’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने शोध-प्रबंध में हेमिंग्वे के नायक के बारे में अपना विशिष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और पश्चिमी आलोचनात्मक ढांचों को चुनौती दी।