लुधियानाः पंजाब में पिछले कुछ दिनों से लंबे बिजली कट को लेकर लोग परेशान चल रहे थे। वहीं इस समस्या का सरकार द्वारा समाधान कर दिया गया है। दरअसल, आज प्रेस वार्ता करते हुए बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर से लंबे पॉवर कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए। मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है।
उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है। इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। उन्होंने कहा कि घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि सभी उपभोक्ताओं को 24×7 बिजली मिल रही है। वहीं धान के सीजन को देखते हुए किसानों को आज से 8 घंटे की जगह 10 घंटे बिजली देने का ऐलान किया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सितंबर में पिछले साल बिजली की पीक डिमांड 13,100 MW थी जो इस साल 16,600 MW पार पहुंची। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है।
कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है। पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं। अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी। दरअसल, पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं।
पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है। दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है।