ऊना,सुशील पंडित: शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के सचिव डॉ. अतुल कोठारी के विचार कि “जिस कौशल की उद्योग को आवश्यकता है, वही कौशल शिक्षा व्यवस्था में विकसित होना चाहिए” पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं स्वदेशी जागरण मंच के जिला प्रचार प्रमुख पंकज सहोड़ ने कहा कि शिक्षा और उद्योगों की जरूरतों के बीच की दूरी कम करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि कौशल आधारित शिक्षा में 70 प्रतिशत व्यावहारिक ज्ञान और 30 प्रतिशत सैद्धांतिक ज्ञान का अनुपात रखने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र के लिए आवश्यक दक्षता भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि कौशल शिक्षा को आपूर्ति आधारित के बजाय मांग आधारित बनाया जाना चाहिए तथा उद्योगों की जरूरत के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए।
सहोड़ ने कहा कि “केवल बोर्ड बदलने से शिक्षा नहीं बदलेगी, शिक्षा का तरीका बदलने से शिक्षा बदलेगी।” सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के साथ व्यावहारिक शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों पर भी जोर देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में खाद्य प्रसंस्करण, हरित कौशल, पर्यावरण पर्यटन, सौर ऊर्जा, विद्युत वाहन, आतिथ्य सेवा और स्थानीय उत्पादों के विपणन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।
सहोड़ ने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है जिसमें डिग्री के साथ दक्षता, ज्ञान के साथ कौशल और शिक्षा के साथ रोजगार मिले। कुशल युवा ही आत्मनिर्भर हिमाचल और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बन सकते हैं।