शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक वर्षा, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण नदी क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की जल वहन क्षमता प्रभावित होने के साथ-साथ मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना के लिए बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वन सलाहकार समिति के निर्णयों एवं सिफारिशों के आधार पर वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि ड्रेजिंग से संबंधित प्रस्तावों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने नदी ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों में गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि का मार्ग परिवर्तन (डायवर्जन) नहीं होता, बल्कि वैज्ञानिक ड्रेजिंग मुख्य रूप से नदियों के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने और बाढ़ के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से की जाती है।