चंडीगढ़: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के महत्व पर जोर देने और इसे और अधिक सुचारू बनाने के उद्देश्य से आज यहां सेक्टर 26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एम.जी.एस.आई.पी.ए.) में एक सेमिनार आयोजित किया गया। पी.डी.एस. सुधार, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी और पोर्टेबिलिटी पर केंद्रित इस सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने लाभार्थियों के लाभ के लिए पी.डी.एस. को और मजबूत बनाने हेतु अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।

अधिक जानकारी देते हुए डॉ. अंजुमन भास्कर ने बताया कि एन.एफ.एस.ए. के तहत लाभार्थियों को राशन का वितरण 2023 से त्रैमासिक आधार पर किया जा रहा है। एन.एफ.एस.ए. के तहत 39,74,000 राशन कार्ड कवर किए गए हैं और लाभार्थियों की संख्या 1.36 करोड़ है। राशन कार्डों की 100 फीसदी आधार सीडिंग हो चुकी है। राज्य में 14,450 उचित मूल्य की दुकानें (एफ.पी.एस.) हैं जो लाभार्थियों को अनाज वितरित करती हैं। पी.एस.एफ.सी. सदस्य चेतन प्रकाश धालीवाल और विजय दत्त ने अपने फील्ड दौरों के अनुभव साझा किए। इस मौके पर पी.एस.एफ.सी. सदस्य जसवीर सिंह सेखों ने पी.डी.एस. के आम लोगों पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव की विवेचना की।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक वरिंदर कुमार शर्मा ने पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में पी.एस.एफ.सी. द्वारा निभाई जा रही सराहनीय सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि पी.एस.एफ.सी. के गठन का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र फीडबैक लेना था। ‘सरकारी योजनाओं में पोषण को बढ़ावा देना’ विषय पर दूसरे सत्र में पी.एस.एफ.सी. के चेयरमैन ने कहा कि 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण का पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अपने हालिया विदेश दौरे के अनुभव साझा करते हुए चेयरमैन ने बताया कि उन्होंने मॉन्ट्रियल की मैकगिल यूनिवर्सिटी का दौरा करके वहां के विशेषज्ञों से बातचीत की। उन्होंने बायो-फोर्टिफिकेशन के पक्ष में तर्क दिए।