अंतिम संस्कार के समय भावुक हुआ पूरा गांव
अमृतसरः जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव थोबा के रहने वाले गुरसाहिब सिंह का शव करीब 20 दिन बाद जर्मनी से उनके पैतृक गांव पहुंचा। गुरसाहिब करीब 4 साल पहले बेहतर भविष्य बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर जर्मनी गया था। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद गुरसाहिब जर्मनी में नौकरी करेगा और अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनेगा। लेकिन परिवार के सपने उस समय टूट गए, जब उन्हें जर्मनी में उसकी मौत की खबर मिली।
गुरसाहिब का शव गांव पहुंचने के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल रहा। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने अपने बेटे के चेहरे को आखिरी बार चूमा। वहीं, बहन ने नम आंखों से अपने भाई को सेहरा बांधा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया।
जर्मनी पुलिस ने आत्महत्या को बताया मौत का कारण
परिवार के मुताबिक, जर्मनी पुलिस ने गुरसाहिब की मौत को आत्महत्या बताया है। हालांकि, परिवार अभी भी उसकी मौत के पीछे की पूरी सच्चाई को लेकर संतुष्ट नहीं है। परिवार का कहना है कि जर्मनी में गुरसाहिब का कुछ रूममेट्स के साथ विवाद हुआ था। विवाद के बाद उसने अपना कमरा भी बदल लिया था।
परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
परिवार किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगा रहा है। उनका कहना है कि गुरसाहिब और उसके रूममेट्स के बीच हुए विवाद तथा उसकी मौत के बीच कोई संबंध था या नहीं, यह जांच का विषय है। परिवार चाहता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर जांच में किसी की गलती या लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
कानूनी प्रक्रिया के चलते 20 दिन बाद भारत आया शव
परिवार के अनुसार, जर्मनी में पुलिस की कार्रवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में समय लगा। इसी वजह से गुरसाहिब का शव करीब 20 दिन बाद भारत लाया जा सका। परिवार ने बताया कि शव को भारत लाने में भारतीय दूतावास और बर्लिन गुरुद्वारा कमेटी की ओर से भी मदद की गई।
कर्ज लेकर बेटे को विदेश भेजा था
गुरसाहिब के विदेश जाने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने कर्ज लिया था। परिवार के मुताबिक, विदेश भेजने के लिए लिया गया कर्ज अभी पूरी तरह चुकाया भी नहीं गया था। उन्हें उम्मीद थी कि गुरसाहिब जर्मनी में काम करके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार देगा और कर्ज चुकाने में मदद करेगा। लेकिन बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुख के साथ-साथ आर्थिक संकट भी बढ़ गया है।
बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनने वाला था बेटा
गुरसाहिब के ताया परगट सिंह ने बताया कि परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उसे विदेश भेजा था। परिवार को भरोसा था कि वह पढ़ाई और काम के बाद अपने माता-पिता का सहारा बनेगा। लेकिन उसकी अचानक मौत ने परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ दीं। अब परिवार बेटे को खोने के गम के साथ कर्ज और आर्थिक परेशानियों का भी सामना कर रहा है।
सरकार से आर्थिक मदद और जांच की मांग
परिवार ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की गलती या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता देने की भी अपील की है, ताकि इस मुश्किल समय में परिवार को कुछ राहत मिल सके।