नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा के करेक्ट द मैप नाम के प्रस्ताव पर अब भारत ने अपना बयान दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने बताया कि इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन को बैलेंस्ड बनाए रखना और दुनिया के क्षेत्रों खासतौर पर अफ्रीका के सामान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव भी पेश किया गया है। भारत ने यूएन के नए नक्शे पर ऐसी प्रतिक्रिया भी दी है जिससे पाकिस्तान भी तिलमिला उठेगा।
जायसवाल का कहना है कि मकसद का समान क्षेत्र वाले मैप प्रोजेक्शन के प्रयोग को प्रोत्साहित करना है। यह महादवीपीय भू-भागों के सापेक्ष आकार को बनाए रखेगा। इस प्रस्ताव से न तो विशेष वैश्विक मैप को अपनाएगा और न ही उसको प्रमाणित करता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या फिर स्थानों के नाम के साथ राजनीतिक मानचित्रण से संबंधित है।
Our response to media queries regarding a UN General Assembly resolution on equal-area world map ⬇️
🔗 https://t.co/sAnpGhX3fA pic.twitter.com/Cfyn3jMcOG
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 6, 2026
अपने वोट के बारे में दी सफाई
जायसवाल ने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में उन्होंने मतदान भी किया है। इक्वल एरिया मैप प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मूल सिद्धातों पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि भारत ने इस बात पर भी जोर दिया है कि यह प्रस्ताव किसी भी खास मैप प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण का समर्थन ही नहीं करता है।
जम्मू-कश्मीर पर साफ है भारत का रुख
भारत के संप्रभु क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख का इलाका भी शामिल है। उन सभी को भारत के ऑफिशियल मैप के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि कोई भी गलत या फिर भ्रामक मैप किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख साफ है।
अमेरिका ने किया यूएन के प्रस्ताव का विरोध
यूएन का मकसद ऐसे विश्व के नक्शों को बढ़ावा देना है जिनमें देशों और महाद्वीपों का क्षेत्रफल वास्तविक अनुपात से ज्यादा पास दिखे। इस प्रस्ताव का 164 देशों ने समर्थन भी दिया है। वहीं अमेरिकी ने अकेले इसका विरोध किया है। इससे 6 देश वोटिंग से दूर भी रहे हैं।