ऊना,सुशील पंडित: राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के नाम सिमरन का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान के नाम का सच्चे मन से सिमरन करने से मनुष्य इस भवसागर को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य का जीवन अनमोल है और इसे सांसारिक मोह-माया में व्यर्थ गंवाने के बजाय प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का नाम स्वयं में ही शक्ति का स्वरूप है। जिस मनुष्य का मन प्रभु के चरणों में लग जाता है, उसके जीवन में आने वाली अनेक परेशानियां स्वत: ही कम होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए, क्योंकि सुख हो या दुख, प्रभु का नाम ही मनुष्य को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्रदान करता है।
बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि आज मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है। धन, संपत्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की दौड़ में वह अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूलता जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी कुछ समय भगवान के नाम के लिए अवश्य निकालें। प्रभु का सिमरन करने के लिए किसी विशेष स्थान या परिस्थिति की आवश्यकता नहीं है, बल्कि मन में श्रद्धा और विश्वास होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके दिव्य स्वरूप से परिचित करवाती है। भगवान श्री कृष्ण ने मानव जीवन को धर्म, कर्म, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके जीवन और उपदेशों से हमें सीख मिलती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार नाव के सहारे मनुष्य नदी को पार करता है, उसी प्रकार भगवान का नाम इस संसार रूपी भवसागर को पार करने का सबसे सरल साधन है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का जाप और सिमरन अत्यंत प्रभावशाली साधना है। मनुष्य यदि श्रद्धा से भगवान श्री कृष्ण का नाम लेता है तो उसके मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और उसे जीवन में सही दिशा मिलती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान से केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रभु से भक्ति, सद्बुद्धि और सेवा का भाव मांगना चाहिए। मनुष्य के जीवन की वास्तविक सफलता इसी में है कि वह स्वयं भी अच्छे कर्म करे और दूसरों को भी सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।
प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कृष्ण के नाम का सिमरन किया। पूरा मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘श्री कृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठा। बाबा बाल जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करने, नाम सिमरन करने तथा जरूरतमंदों की सेवा करने का संदेश दिया।