जालंधर, ENS: पंजाब गौ सेवा कमीशन के उप चेयरमैन कीमती भगत ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल, 21 तारीख के ‘पंजाब बंद’ के आह्वान और चंडीगढ़ में कौमी मोर्चा के नौजवानों की गिरफ्तारी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जगतार सिंह हवारा की पैरोल के सवाल पर कीमती भगत ने कहा कि इसे मानवता के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अदालती फैसलों और अतीत की गलतियों में जाए बिना, मैं मानवता के नाते पंजाब और केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि हवारा अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा काट चुके हैं। उनकी माता जी बेहद वृद्ध और गंभीर रूप से बीमार हैं।
यदि उन्हें पैरोल मिलती है, तो इससे कोई कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं होगी।” ‘वारिस पंजाब दे’ द्वारा 21 तारीख को दिए गए ‘पंजाब बंद’ के आह्वान का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इसका समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि इन दिनों नवरात्र चल रहे हैं और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु माता चिंतपूर्णी, ज्वाला जी, चामुंडा देवी, नैना देवी और वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए हुए हैं। 21 और 22 तारीख को नवरात्र के अंतिम दिन हैं और 23-24 को संगत की वापसी होगी।
कीमती भगत ने कहा कि बंद के कारण हिमाचल से लौटने वाले श्रद्धालुओं और बच्चों को घंटों लंबे जाम में फंसना पड़ेगा, जिससे पंजाब का माहौल प्रभावित होगा। किसान संगठनों द्वारा बंद को दिए गए समर्थन पर उन्होंने कहा कि किसान नेता भी हमारे पंजाबी भाई हैं। उन्हें हिंदू समुदाय की भावनाओं और श्रद्धालुओं की व्यावहारिक समस्याओं का ध्यान रखते हुए बंद के समर्थन पर पुनर्विचार करना चाहिए। चंडीगढ़ में कौमी मोर्चा के नौजवानों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन आता है। लोकतंत्र में ज्ञापन देने का अधिकार सभी को है। यदि नौजवान शांतिपूर्ण ढंग से राज्यपाल को ज्ञापन देने जा रहे थे, तो केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन को इसे संवेदनशीलता से संभालना चाहिए था।

