जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान राज्य में नशा तस्करी के 4,967 आरोपी गिरफ्तार
चंडीगढ़: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण रोडमैप 2026-2029 जारी किए जाने के बाद हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। अब व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ संगठित ड्रग नेटवर्क को खत्म करने, उनके वित्तीय तंत्र को तोड़ने, प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने तथा नशा मुक्ति और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस व्यापक रणनीति की समीक्षा यहां मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय एनसीओआरडी की 13वीं बैठक में की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण रोडमैप 2026-2029 नशे की समस्या से निपटने के लिए एक केंद्रित और समन्वित कार्ययोजना प्रदान करता है। इसमें ड्रग सिंडिकेट को खत्म करने, उनके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने, प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने तथा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार करने पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा भी अपनी प्रवर्तन और रोकथाम संबंधी कार्रवाई को इसी राष्ट्रीय रणनीति के अनुरूप आगे बढ़ाएगा, ताकि राज्य को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।
बैठक में संगठित मादक पदार्थ तस्करी के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए बहुआयामी रणनीति पर चर्चा की गई। ड्रग कार्टेल की पहचान करने, उनके नेटवर्क की मैपिंग करने तथा उनके प्रमुख संचालकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया।
हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एडीजीपी संजय कुमार ने बताया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ वित्तीय कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत जिन व्यक्तियों की संपत्ति अटैच की गई, उनकी संख्या जनवरी-जुलाई 2025 के दौरान 26 से बढ़कर 2026 के दौरान इसी अवधि में 111 हो गई है। यह 326.92 प्रतिशत की वृद्धि है।
राज्य में प्रवर्तन कार्रवाई भी तेज हुई है। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान मादक पदार्थों से संबंधित कानूनों के तहत 2,853 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 2025 की इसी अवधि में 2,161 एफआईआर दर्ज हुई थीं। इस प्रकार एफआईआर में 32.02 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 4,254 से बढ़कर 4,967 हो गई। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मामलों की संख्या भी 267 से बढ़कर 283 हुई है। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि दर 58.20 प्रतिशत से बढ़कर 61.11 प्रतिशत हो गई है।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख मादक पदार्थों की बरामदगी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हेरोइन की बरामदगी में 67.50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 58.583 किलोग्राम तथा अफीम की बरामदगी में 83.99 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 314.553 किलोग्राम बरामद की गई। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एसपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि राज्य की रणनीति अब व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई से आगे बढ़कर संगठित ड्रग सिंडिकेट को खत्म करने और उनके वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार करने पर केंद्रित है। राष्ट्रीय रोडमैप के तहत चिन्हित ड्रग कार्टेल को खत्म करने के लिए दिसंबर 2027 तक खुफिया जानकारी जुटाकर विस्तृत डोजियर तैयार किए जाएंगे। चिन्हित कार्टेल से जुड़े सभी मामलों में वित्तीय जांच भी शुरू की जाएगी।
हरियाणा ने वर्ष 2026 के दौरान अपराध से अर्जित संपत्ति की 30 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके मुकाबले जुलाई तक 13.32 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों को जिला स्तर पर भी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। बैठक में पीआईटीएनडीपीएस एक्ट के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया, ताकि आदतन और संगठित नशा तस्करों को अवैध गतिविधियां जारी रखने से रोका जा सके। उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए मार्च 2027 तक कम से कम 70 आदतन अपराधियों को निवारक निरोध में लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रभावी अभियोजन को भी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। राज्य में वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित 50 एनडीपीएस मामलों का समयबद्ध एवं प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियोजन की लगातार निगरानी तथा मामलों की सुनवाई को प्रभावी और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मादक पदार्थों से जुड़े फरार आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की जाएगी। यदि कोई नशा तस्कर कानून से बचकर विदेश भाग जाता है, तो उसकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ब्लू नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाएंगे। अब तक हरियाणा पुलिस ने ऐसे 29 फरार आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से दो के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस और एक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है।
बैठक में सिंथेटिक ड्रग्स के गुप्त निर्माण की उभरती चुनौती पर भी चर्चा की गई। जिला पुलिस प्रमुखों को ऐसे गुप्त ड्रग लैब की पहचान में मदद करने वाले संकेतों के बारे में जागरूक किया गया है। पुलिस गश्ती दलों को भी ऐसे संभावित ठिकानों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नशे के चिन्हित हॉटस्पॉट की जानकारी सेवा विभाग के साथ साझा की गई है, ताकि इन क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान और नशा मुक्ति संबंधी गतिविधियां संचालित की जा सकें। नशा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और नशा मुक्ति केंद्रों को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि उपचार और पुनर्वास को नशे के खिलाफ अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।
एनसीओआरडी बैठक में राज्य की नशा विरोधी रणनीति के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष जोर दिया गया—मजबूत प्रवर्तन एवं खुफिया कार्रवाई, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर कड़ा नियंत्रण, नशे की मांग एवं इससे होने वाले नुकसान को कम करना तथा क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना।
सेवा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा, विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, आबकारी एवं कराधान आयुक्त विनय प्रताप सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

