उत्तर प्रदेशः योगी सरकार ने जनता की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में सभी तरह के एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इस नए आदेश के बाद अब यूपी में नकली और मिलावटी डेयरी आइटम नहीं बेचे जा सकेंगे। मिली जानकारी के अनुसार पूरे राज्य में एनालॉग पनीर, एनालॉग क्रीम, एनालॉग घी, एनालॉग छेना और एनालॉग खोया उत्पादों पर पूरी तरह से रोक लगा दी। इससे पहले, अधिकारियों ने होटलों और रेस्तरां में गलत लेबल लगाकर बेचे जाने वाले उत्पादों के खिलाफ़ फ़ूड सेफ़्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के ज़रिए पाबंदियां लगाने और कार्रवाई करने का प्रस्ताव दिया था। FSSAI की गलत ब्रांडिंग से जुड़ी गाइडलाइंस के तहत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी एनालॉग उत्पादों (जैसे वनस्पति फैट से बने पनीर, मक्खन और घी) पर इसी तरह की रोक लगाई गई है।
जारी आदेशों में कहा गया है कि अगर किसी डेयरी या डेयरी प्रोडक्ट बनाने या प्रोसेस करने वाली यूनिट में, या उससे जुड़ी जगह पर, या संबंधित फर्म या उसके मालिक के अधिकार वाली किसी भी जगह पर कोई अन्य फैट और हानिकारक केमिकल या मिलावट वाली चीज़ें पाई जाती हैं, तो उस यूनिट में मौजूद सभी डेयरी प्रोडक्ट्स को ज़ब्त करके नष्ट कर दिया जाएगा। वहीं जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, ‘फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ की धारा 34 के तहत इमरजेंसी रोक का आदेश जारी करके ऐसी जगह पर निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया जाएगा। अगर जन-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से होता पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाएगी।
गौरतलब है, कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की गई थी। इस दौरान खाद्य विभाग की टीमों ने कई जगहों पर छापेमारी कर सैंपल लिए थे। जांच के बाद जो रिपोर्ट सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी। सैंपल्स की जांच में दूध और पनीर जैसी चीजों में भारी मिलावट पाई गई। इन उत्पादों में दूध की जगह रिफाइंड तेल, अलग-अलग तरह की फैट और सोयाबीन या उसके उत्पादों को मिलाया जा रहा था।
जांच के दौरान दूध और खोए में जो चीजें मिलीं, वे इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक थीं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मिलावट करने के लिए टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपॉल, टीनोपॉल, हाइड्रोजन परॉक्साइड और विभिन्न हानिकारक न्यूट्रीलाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस तरह के जहरीले केमिकल्स और घटिया चीजों को मिलाकर तैयार किए जा रहे ये नकली उत्पाद लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे थे। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़े नियम बनाए गए हैं। नियमों के मुताबिक दूध और उससे जुड़े उत्पादों का निर्माण और बिक्री उनकी असली और मौलिक प्रकृति में ही होनी चाहिए।

