नई दिल्ली: फुकेट से दिल्ली की ओर जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट को लेकर 4 अगस्त को हुई घटना को लेकर एयरबेस की शुरुआती जांच में अब बड़ा तकनीकी खुलासा हुआ है। शुरुआती डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी डीएफडीआर की रीडिंग के अनुसार, विमान के जरुरी फ्लाइट कंट्रोल्स करीबन 4 सैकेंड तक काम कर रहे थे परंतु इसी दौरान विमान ने करीबन 300 फीट की अचानक गिरावट की दर्ज की है। इससे कमोबेश 24 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को काफी चोटें भी आई थी।
हाइड्रोलिक सिस्टम में आई थी खराबी
एयरबस की शुरुआती रीडिंग के अनुसार, ए320 नियो के एलिवेटर्स और एलेरॉन्स पर एक साथ नियंत्रण खत्म हो गया था। एलिवेटर्स विमान की नाक को ऊपर-नीचे करने वही एलेरॉन्स विमान की दाएं-बाएं मोड़ने में मदद करते हैं। ऐसे में इस दौरान स्पॉयलर्स ने भी काम करना बंद कर दिया है। बताया गया है कि विमान के तीनों हाईड्रोलिक सिस्टम में एक साथ ही खराबी आई थी।
कॉकपिट में स्टॉल वार्निंग सामने की आई बात
करीबन 4 सैकेंड तक एलिवेटर्स और एलेरॉन्स बिना किसी पायलट कमांड के अपने-आप ड्रिफ्ट कर रहे थे। इसी बीच ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया है। कॉकपिट में स्टॉल वार्निंग आने की बात सामने आई। संभावित स्टॉल से बचने के लिए को पायलट ने साइड स्टिक को आगे की ओर धकेल दिया परंतु हाइड्रोलिक पावर न होने के कारण से उनका इनपुट तुरंत विमान की नोज-डाउन मूवमेंट में तब्दील नहीं हुआ है।
इसके कुछ सैकेंड बाद ही तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम के दोबारा काम करने पर पायलट का नोज डाउन इनपुट प्रभावी हो गया है। विमान की ओर से अचानक तेज नोज-डाउन ट्रैजेक्टरी पकड़ ली। इसी दौरान विमान करीबन 300 फीट नीचे आया है। यात्रियों और क्रू को जोरदार झटका लगा और कई लोग घायल हुए हैं। विमान इसके बाद सुरक्षित दिल्ली पहुंचा है।
भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रहा जांच
एयरबस की शुरुआती जांच में संभावित हाइड्रोलिक प्रेशर सेंसर या प्रेशर स्विच की खराबी की ओर इशारा किया गया है परंतु इसे घटना की अंतिम कारण नहीं माना गया है। एयरबस और फ्रांस की बीईए के एक्सपर्ट्स भी जांच में मदद कर रहे हैं। तकनीकी जांच के निष्कर्ष भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी एएआईबी को दिए जा रहे हैं।
यानी यह कहना ठीक नहीं होगा कि 4 सैकेंड तक विमान का नोज डाउन था। सही बात यह है कि करीबन 4 सैकेंड तक विमान के जरुरी फ्लाइट कंट्रोल्स ने काम ही नहीं किया परंतु इसी दौरान पायलट का नोज डाउन इनपुट भी तुरंत प्रभावी नहीं हो पाया। हाइड्रोलिक सिस्टम के दोबारा एक्टिव होने के बाद ही विमान ने तेज नोज-डाउन ट्रैजेक्टरी पकड़ी थी और करीबन 300 फीट नीचे आया था।
