नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन पर अमेरिकी की निर्भरता को कम करने के मकसद से बाहर से मंगाए जाने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से एक बयान जारी किया गया है। इस बयान में यह कहा है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। यह टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोनों पर है जिनका वजन करीबन 25 किलोग्राम से ज्यादा है। इसके अलावा ऐसे ड्रोन जिनमें एडवांस सुरक्षा तकनीक है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में न आने वाले छोटे ड्रोनों पर 25% का कम टैरिफ लगेगा।
आखिर क्यों लगा रहे हैं ट्रंप टैरिफ?
ट्रंप की ओर से टैरिफ सभी देशों से आने वाले ड्रोनों पर लगा है परंतु इसका मुख्य निशाना चीन है। ऐसे में सभी चीनी ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए भारी-भरकम टैरिफ सिर्फ उन्हीं श्रेणियों में लगाया गया है जहां पर चीन का एकाधिकार है। ऐसे में चीन का ग्लोबल अनमैंन्ड एय़रक्राफ्ट मार्केट पर भी दबाव बना हुआ है। अमेरिका के कमर्शियल मार्केट में करीबन 80% ड्रोन चीन में से ही आते हैं। अमेरिका में हॉलीवुड से लेकर कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट और एग्रीकल्चरल सेक्टर में भी चीन के ड्रोन्स का इस्तेमाल होता है। चीनी टेक कंपनी की दुनिया के कमर्शियल ड्रोन मार्केट्स पर 70% से ज्यादा हिस्सेदारी होती है।
इस समय ट्रंप के निशाने पर है चीन
व्हाइट हाउस की ओर से जारी किए गए बयान में यह कहा गया है कि इन उपायों का मकसद ड्रोन और उनके पार्ट्स के घरेलू उत्पादन को बढा़वा देना है। विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना है। ज्यादातर नए टैरिफ अब 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं। पिछले हफ्ते ही चीन की ओर से जबरद्सती मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई चिंताओं के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधो के जवाब में अमेरिका को ड्रोन के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी। इस दौरान छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था। चीन ने यह कदम अमेरिका के द्वारा चीन और 59 बाकी अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के कुछ दिनों के बाद उठाया है।
भारत पर भी होगा असर
ट्रंप के इस फैसले से भारत पर भी असर हो सकता है। भले ही उन्होंने भारत को 100% की सबसे सख्त श्रेणी के अंतर्गत नहीं रखा है परंतु भारतीय ड्रोन एक्सपोर्ट्स पर भी दबाव कुछ कम नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका भारतीय कमर्शियल और छोटे ड्रोनों पर 25% टैरिफ लगा रहा है हालांकि इसके एक अच्छी बात यह है कि अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन मार्केट पर अब चीन का दबाव कम होगा। इससे Idea Forge, Drone Acharya और Garuda Aerospace जैसी भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका के बाजारों में पैर पसारने का एक मौका होगा।
