जालंधर, ENS: पंजाब में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। पंजाब विधानसभा में पेश पंजाब विनियमन शुल्क गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान (संशोधन) विधेयक-2026 को सर्व समिति से पास कर दिया गया। वहीं विधानसभा का अखिरी सत्र खत्म होने के कुछ देर बाद आप पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदियां जालंधर पहुंचे, जहां वह निजी होटल में व्यापारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहाकि सगंठन का काम उन्हें सौंपा गया। ऐसे में वह सभी लोकल लैवल के लीडर से मुलाकात कर रहे है और उनके साथ कार्यों को लेकर समीक्षा करके सलाह ली जा रही है।
वहीं भाजपा-अकाली दल गठबंधन की बातचीत को लेकर कहा कि पंजाब के लोग भाजपा को खारिज कर रहे थे, शिरोमणि अकाली दल को खारिज कर रहे थे। ऐसे में अब पंंजाब के लोगों दोनों को एक-साथ खारिज करने का मौका मिलेगा। स्कूल फीस संशोधन बिल पास किए जाने की सिसोदिया ने सहारना की। उन्होंने कहाकि मान सरकार ने राज्य में अच्छे सरकारी स्कूल बनवाएं। शिक्षा को लेकर बड़े विजन के साथ सीएम भगवंत मान ने काम किया है। वहीं जिन लोगों के बच्चे मैरिट स्कूल में पढ़ते है और प्राइवेट स्कूल मनमानी से उनसे फीस वसूलते है।
इसके लिए सीएम मान काफी आहत हो रहे थे। इसके लिए सीएम मान की ओर से यह बड़ा कानून बनाया गया। इस बिल के दौरान बच्चों से वसूली की फीस को भी स्कूलों से वापिस लिया जाएगा। बता दें कि पास हुए फीस संशोधन बिल के अनुसार अब फीस बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा तय करने के साथ-साथ अधिक फीस वसूली पर अभिभावकों को राशि लौटाने और नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार सामान्य स्थिति में कोई स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में पिछली फीस के मुकाबले पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। विधेयक में फीस की परिभाषा को व्यापक किया गया है।
ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, गतिविधि शुल्क, स्मार्ट क्लास या तकनीकी शुल्क, परिवहन शुल्क, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, परीक्षा शुल्क, अन्य फंड और अनिवार्य आर्थिक योगदान समेत स्कूल या उससे जुड़ी संस्था द्वारा विद्यार्थी अथवा अभिभावक से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से वसूली जाने वाली रकम को फीस माना जाएगा। केवल वास्तविक रूप से वापस की जाने वाली सुरक्षा राशि को इससे बाहर रखा गया है। स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले संशोधित फीस ढांचा स्कूल परिसर में प्रमुख स्थान पर और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कम से कम 90 दिन पहले प्रदर्शित करना होगा। अभिभावकों को ईमेल, इलेक्ट्रॉनिक संदेश, वाट्सएप संदेश, परिपत्र या अभिभावक-शिक्षक बैठक सहित प्रभावी माध्यम से इसकी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।