चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के सोमवार आखिरी दिन काफी अहम रहा। सदन में सरकार की ओर से कुल 9 विधेयक पेश किए गए। जिसमें आखिरी दिन भी विपक्ष आक्राम नजर आया। पंजाब विधानसभा में स्कूल फीस संशोधन बिल पेश किया गया। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार ने स्कूलों का फीस रेगुलेशन बिल पास करवा लिया। मंत्री हरजोत बैंस ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) पेश किया। जिसके बाद सीएम भगवंत मान ने इस पर विचार रखे।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा पेश पंजाब फीस संशोधन विधेयक, 2026 के तहत प्राइवेट शिक्षण संस्थान सालाना अधिकतम 5% ही फीस बढ़ा सकेंगे, जिसके लिए 90 दिन पहले अभिभावकों को नोटिस और वेबसाइट पर जानकारी देना अनिवार्य होगा। सीएम मान ने कहा कि पंजाब में लगभग 7,800 प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें 32 लाख छात्र पढ़ते हैं। प्राइवेट स्कूल फीस में 5 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी नहीं कर सकते। शिक्षा को छीना नहीं जा सकता।
3 साल की अवधि में 15 प्रतिशत की सीमा से ज़्यादा ली गई कोई भी फीस वापस करनी होगी। वहीं, कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की 8% कैपिंग गाइडलाइन का हवाला देते हुए आप सरकार के दावों पर सवाल उठाए और उच्च न्यायालय में सरकार के जवाब का भी जिक्र किया। वहीं, सीएम भगवंत मान ने स्पष्ट कर दिया कि स्कूल की तरफ से वसूले जाने वाले हर खर्च को स्कूल फीस माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 3 साल से पहले वर्दी नहीं बदली जाएगी। स्कूलों ने पेरेंट्स को कस्टमर बना रखा है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल बिल, 2026 पेश किया। उन्होंने कहा इस सर्विस के लिए हमने मुलाजिमों को दो श्रेणी में बांटा है। मुश्किल काम करने वाले मुलाजिमों के लिए 3 साल की शर्त रखी गई। इसमें बिजली कर्मी व सीवर कर्मी शामिल हैं। जबकि, दूसरी श्रेणी में 5 साल की शर्त रखी गई है। इन सब मुलाजिमों को सरकार सीधे कांट्रेक्ट पर लेगी।