ऊना,सुशील पंडित: पीर निगाह मंदिर के संचालन और सरकारीकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही सियासी जंग अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। भाजपा विधायक सतपाल सत्ती द्वारा कांग्रेस सरकार और पूर्व विधायक सतपाल रायजादा पर मंदिर के सरकारीकरण के प्रयास करने के आरोप लगाए जाने के बाद रायजादा ने मीडिया के सामने आकर तीखा पलटवार किया।
रायजादा ने दावा किया कि वर्ष 2018 में, जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, उसी दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को पीर निगाह मंदिर के सरकारीकरण की मांग करते हुए पत्र सौंपा था। उन्होंने कहा कि उस पत्र में मंदिर परिसर और आसपास असामाजिक गतिविधियां संचालित होने की बात कही गई थी। पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों के नाम उनके पास मौजूद हैं और प्रशासन ने उस पत्र के आधार पर भाषा एवं संस्कृति विभाग को अपनी रिपोर्ट भी भेजी थी।
पुलिस चौकी खोलने की मांग उठाई
रायजादा ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पीर निगाह मंदिर के आसपास असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस चौकी खोलने की दिशा में प्रयास किए थे, लेकिन भाजपा सरकार इस मांग को पूरा करने में विफल रही।
ग्रामीणों के पक्ष में खड़े होने का दावा
उन्होंने कहा कि पीर निगाह मंदिर का संचालन स्थानीय ग्रामीणों को ही सौंपा जाना चाहिए और वे इस मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। हालांकि, मंदिर प्रबंधन में संभावित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की आशंकाओं को देखते हुए उन्होंने विजिलेंस जांच की मांग करते हुए पत्र लिखे जाने का भी दावा किया।
कैबिनेट में मामला उठाने का संकेत
रायजादा ने यह भी कहा कि पीर निगाह मंदिर से जुड़े पूरे मामले को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जा सकता है, ताकि मंदिर संचालन, प्रबंधन और आय-व्यय से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्ट निर्णय लिया जा सके। पीर निगाह मंदिर को लेकर दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज होते जा रहे हैं, जिससे यह मामला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।