ऊना, सुशील पंडित : युवाओं में अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश अग्निशमन सेवा विभाग और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) ऊना ने संस्थान परिसर में अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम एवं मॉक ड्रिल का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों को आग लगने की घटनाओं की रोकथाम, आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तथा सुरक्षित निकासी (एवाक्युएशन) की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत संवादात्मक जागरूकता सत्र से हुई। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने आग लगने के सामान्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए घरों, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, कक्षाओं और कार्यस्थलों पर अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय बताए। प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों (फायर एक्सटिंग्विशर) की जानकारी दी गई तथा आपातकालीन परिस्थितियों में उनके सही उपयोग का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
मॉक ड्रिल बनी मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण व्यावहारिक मॉक ड्रिल रही। अग्निशमन विभाग की टीम ने आग बुझाने की आधुनिक तकनीकों, बचाव कार्यों और भवनों से सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अग्निशामक यंत्रों का सुरक्षित उपयोग स्वयं करके देखा और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस अभ्यास से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली आपातकालीन प्रक्रियाओं को समझने और ऐसे हालात का आत्मविश्वास के साथ सामना करने की तैयारी मिली।
निदेशक प्रो. मनीष गौर ने जताया आभार
इस अवसर पर आईआईआईटी ऊना के निदेशक प्रो. मनीष गौर ने हिमाचल प्रदेश अग्निशमन सेवा विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अग्नि सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है और प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए सदैव सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच इस प्रकार का सहयोग सुरक्षित परिसर और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम ने हिमाचल प्रदेश अग्निशमन सेवा विभाग और आईआईआईटी ऊना की जन-सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से इस पहल ने प्रतिभागियों में अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने का आत्मविश्वास भी विकसित किया।