उज्जैनः मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाए जाने के विरोध में सोमवार को तनाव बढ़ गया। उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। यह विवाद उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जुड़ा है। सड़क को चौड़ा करने के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाया जाना प्रस्तावित है।
रिपोर्ट के अनुसार, समुदाय के कुछ सदस्यों ने सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के एक हिस्से को खुद हटा दिया था, जबकि परियोजना को लेकर अलग-अलग समूहों में मतभेद सामने आए। प्रस्तावित परियोजना के तहत खजराना वाली मस्जिद से गणेश चौक तक करीब 730 मीटर लंबी सड़क को चौड़ा किया जाना है। करीब 9.8 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 272 संरचनाएं प्रभावित होने की बात कही गई है, जिनमें धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग खुद ही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे, लेकिन इस दौरान नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया।
कुछ लोग हंगामा करने लगे। मौके पर भारी भीड़ जुट गई। पथराव करने का प्रयास किया गया। हालांकि, भारी संख्या में जमा हुए लोगों को पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर हटाए। स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जानकारी के मुताबिक, मौके पर उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि एहतियातन शहर भर में अलर्ट जारी किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,500 से अधिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमों को भी मौके पर लगाया गया है।
प्रशासन ने शहर में अलर्ट जारी करते हुए मस्जिद के आस-पास करीब 500 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। मौके पर प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान सुरक्षाबलों पर पथराव की भी कोशिश हुई। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मस्जिद परिसर को हटाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से लोगों की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की। प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि मामला अदालत में लंबित है और प्रशासन को सड़क चौड़ीकरण के लिए वैकल्पिक भूमि पर विचार करना चाहिए।