नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद और कच्चे तेल में गिरावट से आज दुनियाभर के बाजारों में तेजी आई है। इसका असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा उछाल आई जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी50 इंडेक्स भी 350 अंक उछल गया। सुबह 9.17 बजे सेंसेक्स 1040.51 अंक यानी 1.38% तेजी के साथ 76,568.46 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 343.90 अंक यानी 1.46% ऊपर 23,966.80 अंक पर पहुंच गया। इस तेजी से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 8 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 470 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
इस बीच रुपये भी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। पिछले सत्र में यह 95.11 पर बंद हुआ था और आज 94.68 पर खुला जो 8 मई के बाद इसका उच्चतम स्तर है। सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर तेजी के साथ खुले। इंडिगो के शेयरों में चार फीसदी से ज्यादा तेजी आई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक और टाइटन में भी उल्लेखनीय तेजी रही। दूसरी ओर, सन फार्मा के शेयरों में गिरावट रही।
निफ्टी में श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और टाटा मोटर्स पैसेंजर वीकल्स में सबसे ज्यादा तेजी रही। ब्रॉडर मार्केट में भी तेजी आई है। निफ्टी मिडकैप 1.4 फीसदी तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 1.7 फीसदी तेजी आई है। सेक्टरवाइज देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा तेजी आई है। दूसरी ओर निफ्टी ऑटो और निफ्टी हेल्थकेयर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान शांति समझौते के लिए सहमत हो गया है। इससे पश्चिम एशिया में तीन महीने से अधिक समय से चला आ रहा युद्ध खत्म हो जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों ने एकदूसरे के खिलाफ सैन्य अभियान तुरंत बंद करने की घोषणा की है। इससे कच्चे तेल की कीमत में आज भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 5 फीसदी तक गिर गया था। अभी यह 4.66 फीसदी गिरावट के साथ 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.16 फीसदी गिरावट के साथ 80.50 डॉलर पर आ गया। तेल सस्ता होने से महंगाई में कमी आने की उम्मीद है। इससे सेंट्रल बैंकों का ब्याज को लेकर रुख भी बदल सकता है क्योंकि आने वाले दिनों में कई देशों के केंद्रीय बैंकों की मीटिंग होने वाली है।
