नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लद्दाख में चल रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक खास कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतगर्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है।
आधिकारिक बयान किया गया जारी
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में यह कहा गया है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का यह मानना है कि इस कदम से लद्दाख की मांगों को लेकर चल रहे गतिरोध को खत्म करने में मदद मिलेगी।
सोनम वांगचुक पिछले काफी समय से लद्दाख को छठी अनूसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उनकी हिरासत के बाद लद्दाख और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। अब हिरासत खत्म होने के बाद यह उम्मीद जताई सजा रही है कि केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का नया दौर शुरु हो सकता है।
वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसी सख्त धाराओं के इस्तेमाल पर नागरिक समाज और विपक्षी दलों में तीखी प्रतिक्रिया दी थी। गृह मंत्रालय ने अब साफ किया कि भविष्य की पॉजिटिव चर्चाओं को ध्यान में रखते हुए ही यह रिहाई सुनिश्चित की गई है ताकि केंद्र और लद्दाख के बीच विश्वास की कमी को दूर किया जा पाए।
इसलिए किया गया था गिरफ्तार
सोनम वांगचुक को लद्दाख में कुछ महीने पहले हुई हिंसक घटनाओं के सिलसिले में हिरासत में लिया गया है। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई थी। इसी मामले में प्रशासन में एहतियात के तौर पर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया था।