ऊना /सुशील पंडित: श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां स्थित संत बाबा बाल जी महाराज आश्रम में चल रहे वार्षिक महोत्सव के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर संत बाबा बाल जी महाराज ने संगत को संबोधित करते हुए भक्ति, सत्संग और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तृत प्रवचन दिए। उनके प्रेरणादायक विचारों से उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
अपने प्रवचन में बाबा बाल जी ने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता लाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति संतों की वाणी सुनता है और अच्छे विचारों के साथ जुड़ता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। सत्संग से मनुष्य का परमात्मा के साथ संबंध मजबूत होता है और जीवन की उलझनों से निकलने का मार्ग भी स्पष्ट होता है।
बाबा बाल जी ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची भक्ति दिखावे या बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि निष्कपट हृदय और सच्ची श्रद्धा से होती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य पूरे विश्वास और समर्पण के साथ प्रभु का स्मरण करता है, तो उसके जीवन में शांति, संतोष और आनंद का संचार होता है। भक्ति मन को निर्मल बनाती है और व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में सत्संग का महत्व और बढ़ जाता है। सत्संग से व्यक्ति मानसिक शांति प्राप्त करता है और नकारात्मक विचारों से दूर रहता है। संतों की वाणी सुनकर मनुष्य अपने जीवन के उद्देश्य को समझ पाता है और समाज में प्रेम, भाईचारा व सेवा की भावना विकसित होती है।
महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आश्रम पहुंचे। भजन-कीर्तन, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रमों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालुओं ने बाबा बाल जी के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया। आश्रम प्रबंधन की ओर से संगत के लिए लंगर और अन्य व्यवस्थाएं भी सुचारू रूप से की गई थीं। सेवादारों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ श्रद्धालुओं की सेवा की, जिसकी संगत ने सराहना की।
वार्षिक महोत्सव के छठे दिन हुए इन प्रवचनों ने श्रद्धालुओं के मन में नई ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रेरणा का संचार किया। बाबा बाल जी के संदेश ने यह स्पष्ट किया कि सत्संग, भक्ति और सेवा का मार्ग अपनाकर ही मनुष्य सच्चे सुख और आत्मिक शांति को प्राप्त कर सकता है। वहीं वृंदावन से पधारे श्रद्धेय गौरव कृष्ण शास्त्री जी ने भागवत कथा के मधुर प्रसंग और कथा के महात्म्य पर प्रकाश डालते हए श्री कृष्ण भगवान की लीलाओं से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
