अमृतसर: सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से पवित्र गुरबाणी के लाइव प्रसारण के अधिकारों को लेकर उपजे नए विवाद के बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की है। अध्यक्ष धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि श्री हरिमंदिर साहिब से गुरबाणी कीर्तन प्रसारण के समस्त हक और अधिकार केवल और केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास ही सुरक्षित हैं और किसी भी निजी चैनल, वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इसे अपने स्तर पर अपलोड, री-डायरेक्ट या लाइव चलाने की अनुमति नहीं है।
एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि बीती रात 9 बजे के करीब जी.टी.सी. (GTC) चैनल की ओर से एक चिट्ठी प्राप्त हुई थी, जिसमें शिरोमणि अकाली दल के एक प्रवक्ता के बयान का हवाला देकर दावा किया गया था कि वे दोपहर से गुरबाणी का लाइव प्रसारण शुरू करने जा रहे हैं। धामी ने स्पष्ट किया कि शिरोमणि कमेटी का उस प्रवक्ता से कोई लेना-देना नहीं है और न ही एसजीपीसी की ओर से जी.टी.सी. को कोई अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा, “किसी प्रवक्ता के बयान को आधार बनाकर कोई निजी चैनल गुरबाणी का प्रसारण अपने आप शुरू नहीं कर सकता। यह पूरी तरह अनियमित और गैर-कानूनी कार्य है।” एसजीपीसी ने आज सुबह ही जी.टी.सी. को चिट्ठी का जवाब भेजने के साथ-साथ एक लीगल नोटिस भी जारी कर दिया है। धामी ने चेतावनी दी कि यदि जीटीसी ने तुरंत प्रसारण बंद नहीं किया तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गुरबाणी प्रसारण का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रस्ताव
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसजीपीसी अध्यक्ष ने गुरबाणी प्रसारण के ऐतिहासिक समझौतों का विवरण भी साझा किया।
2000 से 2011: 15 सितंबर 2000 को ईटीसी चैनल के साथ 11 साल का समझौता हुआ था, जो 2007 में ‘जी नेक्स्ट मीडिया’ (Zee Next Media) बन गया। यह समझौता 24 जुलाई 2012 को समाप्त हुआ।
2012 से 2023: 2012 में पुनः 11 साल के लिए समझौता रिन्यू किया गया, जो जुलाई 2023 तक चला।
यूट्यूब लॉन्च और प्रस्ताव संख्या 763: जुलाई 2023 में शिरोमणि कमेटी ने अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल लॉन्च किया। 14 जुलाई 2023 के प्रस्ताव (प्रस्ताव संख्या 763, कॉलम 7) के तहत यह प्रमाणित किया गया था कि गुरबाणी प्रसारण के सभी राइट्स एसजीपीसी के पास रहेंगे। किसी अन्य पक्ष को इसे डाउनलोड या री-स्ट्रीम करने का हक नहीं होगा, हालांकि लिंक शेयर करने की छूट सबके लिए है। धामी ने बताया कि जुलाई 2023 में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से एक निर्देश आया था कि जब तक एसजीपीसी का अपना सैटेलाइट चैनल चालू नहीं हो जाता, तब तक संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी चैनल के माध्यम से भी निर्विघ्न गुरबाणी प्रसारण जारी रखा जाए। एसजीपीसी ने सैटेलाइट चैनल के लाइसेंस के लिए दिल्ली में कई बार संपर्क किया, लेकिन नियमों के अनुसार किसी धार्मिक संस्था को सीधे सैटेलाइट चैनल लाइसेंस मिलने में कानूनी अड़चनें आ रही हैं, जिन्हें हल करने के लिए प्रयास आज भी जारी हैं।
विरोधियों द्वारा लगाए जा रहे वित्तीय आरोपों का जवाब देते हुए एडवोकेट धामी ने बताया कि जब एसजीपीसी ने उप-समिति के माध्यम से विभिन्न कंपनियों से टेंडर मंगवाए थे, तो सबसे कम रेट 12 लाख रुपये महीना आया था। इस हिसाब से शिरोमणि कमेटी को सालाना 1 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च करने पड़ने थे। लेकिन बाद में जी नेक्स्ट मीडिया/पी.टी.सी. ने अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर बिना किसी खर्च (फ्री ऑफ कॉस्ट) सैटेलाइट फीड देने के लिए सहमति जताई, जिससे शिरोमणि कमेटी का सालाना करोड़ों रुपया बचा। उन्होंने कहा कि जुलाई 2023 के बाद जी नेक्स्ट के साथ कोई नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया गया और न ही उन्हें कोई विशेष एकाधिकार दिया गया है।
एडवोकेट धामी ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल लगातार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। विधानसभा में एसजीपीसी के मुद्दों पर हो रही बहसों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे सरकार अपने असली मुद्दे भूलकर केवल शिरोमणि कमेटी को ही निशाना बना रही है। उन्होंने दावा किया कि जी.टी.सी. चैनल भी किसी सत्तारूढ़ दल के धनवान विधायक/नेता से संबंधित है, जो राजनीतिक शह पर ऐसी हरकतें कर रहा है।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने मीडिया और संगत से अपील की कि गुरबाणी के मुद्दे पर किसी भी तरह का भ्रम न फैलाया जाए। एसजीपीसी एक्ट के अनुसार चलने वाली एक मर्यादित संस्था है और इसका हर फैसला एग्जीक्यूटिव कमेटी की मंजूरी से ही होता है। उन्होंने जी.टी.सी. सहित सभी निजी प्लेटफॉर्मों को चेतावनी दी कि शिरोमणि कमेटी के एकाधिकार में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुरबाणी के अधिकारों की रक्षा के लिए हर कानूनी चाराजोई की जाएगी।