पठानकोटः पंजाब-जम्मू सीमा पर स्थित बमियाल सेक्टर में रेत और बजरी से भरे भारी ट्रकों की आवाजाही को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोजाना बड़ी संख्या में ट्रक रात के अंधेरे में लिंक रोड के रास्ते जम्मू से पंजाब में दाखिल हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन भारी वाहनों के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के विरोध में स्थानीय लोगों ने बीती रात जम्मू से पंजाब की ओर आने वाले एक लिंक रोड को बंद कर दिया। सड़क बंद होने के बाद मौके पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं।
100 टन तक रेत-बजरी लेकर पहुंच रहे ट्रक
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई ट्रकों में करीब 100 टन तक रेत और बजरी लदी होती है। उनका आरोप है कि ये ट्रक मुख्य नेशनल हाईवे का इस्तेमाल करने के बजाय लिंक रोड से पंजाब में प्रवेश करते हैं। लोगों का कहना है कि भारी ट्रकों की लगातार आवाजाही से लिंक रोड पर हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
टोल बचाने के लिए लिंक रोड इस्तेमाल करने का आरोप
मौके पर मौजूद एक ट्रक ड्राइवर से जब इस बारे में बात की गई तो उसने बताया कि अगर ट्रक नेशनल हाईवे के रास्ते जाए तो करीब 2,000 रुपये टोल देना पड़ता है। ड्राइवर के मुताबिक, टोल बचाने के लिए कई बार मालिक उन्हें लिंक रोड से जाने के लिए कहते हैं। उसका कहना था कि रास्ता चुनने में ड्राइवर की अपनी मर्जी नहीं होती और वह मालिक के निर्देश पर चलता है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय भारी ट्रकों के गुजरने से सड़क पर रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। उनका आरोप है कि लिंक रोड भारी वाहनों के लिए नहीं है, फिर भी बड़ी संख्या में ट्रक यहां से गुजर रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और नियमों के खिलाफ चल रहे भारी वाहनों पर कार्रवाई की जाए।
पुलिस के जवाब से उठे सवाल
जब इस मामले को लेकर मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि दिन के समय इस रास्ते पर ट्रकों की नो-एंट्री है। हालांकि, अधिकारी ने रात के समय इन ट्रकों की आवाजाही को लेकर कहा कि यह मामला हाई-लेवल का है और संभव है कि ट्रक कानूनी तरीके से आ रहे हों।
ट्रकों की लंबी कतार से बढ़ी परेशानी
सड़क बंद होने के बाद बड़ी संख्या में रेत-बजरी से भरे ट्रक रास्ते में खड़े हो गए। इससे यातायात प्रभावित हुआ और स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। फिलहाल स्थानीय लोग इस मामले में प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।