अमृतसरः एसजीपीसी कार्यालय में एसजीपीसी की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद एसजीपीसी अध्यक्ष अधिवक्ता हरजिंदर सिंह धामी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। उनकी चुप्पी पर पिछले कई दिनों से चर्चा हो रही थी, जिस पर धामी ने कहा कि यह मामला किसी सोशल मीडिया ट्रायल का विषय नहीं है, बल्कि पुलिस जांच का विषय है। श्री गुरु हरगोविंद साहिब जी के मीरी-पीरी दिवस के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब से मीरी-पीरी खालसा मार्च का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि इस मार्च के दौरान लगभग एक हजार गांवों को कवर किया गया था।
उन्होंने कहा कि हर गांव और कस्बे से एक ही आवाज सुनी गई कि पंजाब को ड्रग्स से बचाया जाना चाहिए। धामी ने कहा कि इस मार्च के दौरान कई बच्चों ने सिख धर्म में शामिल होने का संकल्प भी लिया। एसजीपीसी अध्यक्ष ने सभी संगतों के साथ-साथ मार्च में शामिल होने वाले एसजीपीसी कर्मचारियों को भी धन्यवाद दिया। पंजाब सरकार द्वारा शिरोमणि समिति अधिनियम के गठन के संबंध में चल रही चर्चा पर धामी ने कहा कि हरियाणा से सबक लिया जाना चाहिए कि हरियाणा कमेटी कैसे खंडित हो गई है।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के चुनाव को एक मुद्दा बनाया जा रहा है और वह सरकार से जल्द से जल्द एसजीपीसी के आम चुनाव कराने की मांग करेंगे। भाई बलवंत सिंह राजोआना के साथ बैठक के बारे में बात करते हुए धामी ने कहा कि उनके साथ सैद्धांतिक पक्ष पर चर्चा हुई थी। धामी के अनुसार, भाई राजोआना ने कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे और उन्हें अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वह फांसी के लिए तैयार हैं और उन्होंने अपनी आजीवन कारावास की सजा को कम करने की याचिका को वापस लेने की मांग की। धामी ने कहा कि इस पर चर्चा की गई है कि श्री अकाल तख्त साहिब से अपील की जानी चाहिए और इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
श्री आनंदपुर साहिब की घटना पर धामी ने कहा कि जब तक अदालत कोई फैसला नहीं लेती, तब तक एसजीपीसी के खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है और उनके खिलाफ धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। क्या यह राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जब चाहें उनसे मिल सकते हैं। धामी ने कहा कि इस मामले में एसजीपीसी द्वारा पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी का एक प्रतिनिधिमंडल तीन दिनों के भीतर पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात करेगा और मामले की सीबीआई जांच की मांग करेगा।